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महिला आरक्षण बिल: सम्राट चौधरी बोले- लड़ाई रुकेगी नहीं, तेजस्वी यादव ने कहा- ‘गलत इरादे…’

लोकसभा से शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को 131वां संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका. इस पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Bihar CM Samrat Choudhary) ने कहा कि लोकसभा में जो दृश्य देखने को मिला वह देश की नारीशक्ति की आशाओं के विपरीत था.

सम्राट चौधरी ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” जैसे ऐतिहासिक संविधान संशोधन को, जो महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व देने का मार्ग प्रशस्त करता, उसे विपक्षी दलों द्वारा अवरुद्ध किया जाना अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि विपक्ष द्वारा देश की आधी आबादी के अधिकार, सम्मान और सहभागिता के अवसर को ठुकराने जैसा है.

‘इसकी गूंज दूर तक जाएगी’

उन्होंने कहा, “महिलाओं को उनका हक दिलाने की यह लड़ाई रुकेगी नहीं, यह जनभावना बनकर हर घर, हर समाज और हर चुनाव तक पहुंचेगी. नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहीं थमने वाली नहीं है, इसकी गूंज दूर तक जाएगी. जो लोग महिलाओं के अधिकार और सम्मान के रास्ते में बाधा बनेंगे, उन्हें जनता का जवाब अवश्य मिलेगा.”

क्या बोले तेजस्वी यादव?

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. अपने एक्स पोस्ट के जरिए तेजस्वी यादव ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में संविधान बदलने के गलत इरादे से लाए गए संविधान संशोधन बिल का आज लोकसभा में गिरना प्रमाणित करता है कि बहुमत के बल पर आप जनभावना का गला घोंट, संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार कर, परिसीमन के नाम पर विपक्षी दलों के अधिकारों और क्षेत्रीय संतुलन को नहीं बिगाड़ सकते.

उन्होंने कहा कि विपक्ष की चट्टानी एकता ने आज फिर यह साबित कर दिया कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, परंपराओं, जनतांत्रिक संरचना, संविधान और दलित, पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्गों की महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

‘संशोधन बिल का गिरना…’

आरजेडी नेता ने कहा कि संविधान संशोधन बिल का गिरना दर्शाता है कि बिना सर्वदलीय आम सहमति और देश व्यापी विमर्श के, चालाकी से, अनमने से मन से राजनीतिक जल्दबाजी में लाए गए इस विधेयक के पक्ष में एनडीए सरकार के पास ठोस नैतिक और संवैधानिक तर्क भी नहीं थे. पहले से ही सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पुन: संशोधन के लिए विशेष संसद सत्र बुलाकर उसे पेश करना केवल और केवल विभिन्न राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक निम्नस्तर का पाखंड, प्रपंच और प्रोपेगेंडा था.

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