इंदौर नगर निगम में मंगलवार (7 मार्च) को 8,455 करोड़ रुपये का बजट पेश होने के दौरान ‘वंदे मातरम’ को लेकर भारी हंगामा हो गया. कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम द्वारा वंदे मातरम गाने से इनकार करने पर सदन का माहौल गरमा गया. बीजेपी पार्षदों के कड़े विरोध के बाद सभापति ने कार्रवाई करते हुए कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर निकाल दिया. इस पूरे बवाल के बीच नगर निगम का बजट बहुमत से पारित कर दिया गया.
बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान जब वंदे मातरम का गान हो रहा था, तब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने इसे गाने से ऐतराज जताया. इस पर बीजेपी पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास जाकर नारेबाजी शुरू कर दी. सदन में भारी शोर-शराबा होने लगा. स्थिति को नियंत्रित करने और अनुशासन बनाए रखने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया को सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया.
‘संविधान में वंदे मातरम गाना जरूरी नहीं’
सदन से बाहर निकाले जाने के बाद फौजिया शेख अलीम ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम भारत माता की पूजा नहीं करते. जिस तरीके से वंदे मातरम गाने या ‘जय श्री राम’ कहने का दबाव बनाया जा रहा है, वह बहुत गलत है और भारत के संविधान से मेल नहीं खाता.” उन्होंने कहा कि संविधान में राष्ट्रगान (जन गण मन) गाने की बात है, लेकिन राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) गाने की कोई अनिवार्यता नहीं है. हालांकि, जब उनसे संविधान की धारा पूछी गई, तो वह इसका जवाब नहीं दे सकीं.
‘किसी के बाप में दम हो तो बुलवाकर दिखाए’
वंदे मातरम के इसी मुद्दे पर बहस के दौरान खजराना क्षेत्र की एक अन्य कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान ने विवादित बयान देकर आग में घी डालने का काम किया. जब सदन में वंदे मातरम को लेकर चर्चा चल रही थी, तभी रूबीना ने बीच में उठकर कहा, “किसी के बाप में दम हो तो वह हमसे वंदे मातरम बुलवाकर दिखाए.” इस बयान के बाद सदन में बवाल और ज्यादा बढ़ गया.
महापौर का पलटवार- ‘धर्म से बड़ा देश है’
इस पूरे विवाद पर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, “संविधान में भले ही वंदे मातरम गाने की अनिवार्यता न हो, लेकिन इसका अपमान करने का अधिकार किसी को नहीं है. धर्म से बड़ा देश होता है और देश की रक्षा करना सबसे पहला धर्म है.” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें इस देश की जय बोलने में आपत्ति है, उन्हें यह तय कर लेना चाहिए कि उन्हें कहां रहना है.
नेता प्रतिपक्ष ने दी सफाई
पार्षदों के बयानों से विवाद बढ़ता देख नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे (कांग्रेस) ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी सदस्य की व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के खून की बूंद-बूंद में ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ समाहित है. फौजिया अलीम पर कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को दे दी गई है और आगे का निर्णय प्रदेश स्तर पर ही लिया जाएगा.