उद्धव ठाकरे गुट की सीनियर नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जिससे सियासी पारा हाई हो गया है. चुनावी राज्य तमिलनाडु के डाटा का जिक्र करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने नाराजगी जताई है और दावा किया है कि राज्य में सभी बड़ी पार्टियों ने एक भी ब्राह्मण चेहरे को उम्मीदवार नहीं बनाया. इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट किया और लिखा- ‘ऐसा और भी राज्यों में होगा… और बजाओ ताली और थाली.’
एक्स पोस्ट में प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, “मुझे खुशी है कि मैंने एक ऐसे आंदोलन को प्रेरित किया जो हमेशा आक्रोशित ही रहता है. जिस भी पक्ष के साथ भेदभाव होता है, मैं उसके पक्ष में बोलूंगी, चाहे वह मुस्लिम हों, SC-ST हों, ईडब्ल्यूएस हों या इस मामले में ब्राह्मण हों.”
आरक्षण पर प्रियंका चतुर्वेदी का सवाल
इतना ही नहीं, आरक्षण के मकसद की सफलता पर सवाल उठाते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी पूछा कि क्या रिजर्वेशन का फायदा उस हर समुदाय को मिला है जिसको इसकी जरूरत थी या फिर कुछ समुदायों ने इसका ज्यादा लाभ उठाया? यूबीटी नेता ने अपने पोस्ट में लिखा, “…और जब हम आक्रोश की बात कर ही रहे हैं, तो यह भी जांचने का समय है कि प्रतिनिधित्व के नेक इरादे से शुरू हुई आरक्षण व्यवस्था ने क्या वास्तव में सभी आरक्षित वर्गों को समान रूप से लाभ पहुंचाया है या फिर इसका लाभ कुछ समुदायों ने दूसरों की तुलना में अधिक उठाया है?” प्रियंका चतुर्वेदी ने दो टूक यह भी कहा कि वह कठिन सवाल पूछेंगी, जवाब देना होगा.
प्रियंका चतुर्वेदी के इस पोस्ट से जनता सहमत नहीं दिख रही. कई लोगों ने यूबीटी नेता के पोस्ट पर कमेंट कर लिखा है कि जब उन्हें ब्राह्मण उम्मीदवारों का डेटा पता लगा, तब उन्होंने आवाज उठाई, लेकिन जब अन्य समुदायों के साथ ऐसा कुछ होता है तो वह चुप्पी साध लेती हैं. हालांकि, प्रियंका चतुर्वेदी ने दावा किया है कि वह उस हर समुदाय के पक्ष में हैं, जिसको भेदभाव का सामना करना पड़ता है. इस मामले में वह समुदाय ब्राह्मण है.