वसंत के मौसम और खिले हुए रंग-बिरंगे ट्यूलिप फूलों के बीच कश्मीर में कैंसर से जंग लड़ रहे नन्हे बच्चों के लिए सोमवार (6 मार्च) का दिन बेहद खास रहा. शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) श्रीनगर के ऑन्कोलॉजी विभाग ने इन ‘नन्हे योद्धाओं’ के इलाज के एक हिस्से के रूप में मशहूर इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन की एक विशेष सैर का आयोजन किया.
SKIMS के डायरेक्टर प्रो. एम. अशरफ गनी ने इस सैर को हरी झंडी दिखाई और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इसकी तस्वीरें भी साझा कीं. इस पहल का मुख्य मकसद बच्चों को अस्पताल की चारदीवारी और मेडिकल प्रक्रियाओं से निकालकर प्रकृति की शांत गोद में खुशी और सुकून के पल देना था.
वैज्ञानिक आधार पर की गई है यह पहल
इस सैर के पीछे के मेडिकल और वैज्ञानिक कारणों को समझाते हुए प्रो. एम. अशरफ गनी ने बताया कि यह पहल वैज्ञानिक समझ पर आधारित है. उन्होंने कहा कि प्रकृति के बीच बिताए गए ऐसे सकारात्मक अनुभवों का बच्चों के ‘हाइपोथैलेमिक-पिट्यूटरी-एड्रेनल (HPA) एक्सिस’ पर सीधा असर पड़ता है. इससे बच्चों का तनाव कम होता है और उनमें भावनात्मक मजबूती व खुशी बढ़ती है, जो उनके इलाज और रिकवरी में बेहद मददगार साबित होती है.
डॉक्टरों की टीम रही साथ, मुफ्त एंट्री और जलपान की व्यवस्था
इस खास सैर को सफल बनाने में जम्मू-कश्मीर के फ्लोरीकल्चर, पार्क और गार्डन विभाग ने भी अहम भूमिका निभाई. विभाग के सेक्रेटरी ज़ुबैर अहमद और फ्लोरीकल्चर कश्मीर की डायरेक्टर मासूमा माथोरा के सहयोग से बच्चों के लिए मुफ्त एंट्री और जलपान की विशेष व्यवस्था की गई.
सैर के दौरान बच्चों के आराम और मेडिकल देखभाल का ध्यान रखने के लिए मेडिकल ऑफिसर डॉ. सूज़न, रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. समारा और SKIMS का समर्पित स्टाफ लगातार उनके साथ मौजूद रहा.
डायबिटीज पीड़ित बच्चों के लिए भी होगी ऐसी सैर
हजारों खिले ट्यूलिप के बीच बच्चों के चेहरों पर लौटी मुस्कान ने यह कड़ा संदेश दिया कि मुश्किल हालात में भी खुशियों के पल खिल सकते हैं. प्रो. गनी ने घोषणा की है कि यह सिलसिला यहीं नहीं रुकेगा. अगले चरण में, कैंसर से रिकवर हो रहे अन्य मरीजों और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे छोटे बच्चों के लिए भी ऐसी ही सैर का आयोजन किया जाएगा. फ्लोरीकल्चर विभाग ने भी भविष्य में ऐसे बच्चों की पूरी मदद करने का आश्वासन दिया है.