मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां मवेशी के शिकार का बदला लेने के लिए एक बाघ को ज़हर देकर मार दिया गया. पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडल और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) की संयुक्त टीम ने तत्परता दिखाते हुए न केवल बाघ का शव बरामद किया, बल्कि इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
घटना का खुलासा तब हुआ जब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की बफर टीम और पश्चिम वनमंडल की टीम रेडियो कॉलर वाले बाघ की लोकेशन ट्रेस कर रही थी. गुरुवार शाम से ही सांगाखेड़ा परिक्षेत्र में सर्चिंग जारी थी. शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे छातीआम बीट के कक्ष क्रमांक P-266 और P-262 के पास एक मवेशी (बैल) का शव मिला. संदेह होने पर जब डॉग स्क्वायड की मदद से सघन छानबीन की गई, तो पास ही जमीन में दफनाया गया बाघ का शव बरामद हुआ.
बदले की आग और साज़िश
मुख्य आरोपी उदेसिंग (50 वर्ष, निवासी छातीआम) को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने चौंकाने वाले खुलासे किए. आरोपी ने बताया कि कुछ दिन पहले बाघ ने उसके बैल का शिकार किया था. अपने नुकसान का बदला लेने के लिए उदेसिंग ने मृत बैल के शरीर में ‘यूरिया’ नामक घातक कीटनाशक मिला दिया. जब बाघ दोबारा अपना शिकार खाने लौटा, तो ज़हरीला मांस खाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर बाघ को जंगल में ही दफना दिया था.
चार आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
वन विभाग ने इस मामले में उदेसिंग के अलावा बिसनलाल शीलू (पुटईआम), मनोहर सिंग (बोब झिरना, नर्मदापुरम) और कैलाल (कूचीखोह) को गिरफ्तार किया है. इन सभी पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
शुक्रवार शाम को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक राखी नंदा और पश्चिम छिंदवाड़ा वनमंडलाधिकारी (DFO) साहिल गर्ग ने प्रोटोकॉल के अनुसार मृत बाघ का दाह संस्कार किया गया. विभाग अब इस घटना के अन्य पहलुओं की भी सूक्ष्मता से जांच कर रहा है. पकड़े गए आरोपियों को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा.