चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा निवासी अनुज अग्निहोत्री ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है. उनकी इस उपलब्धि से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. अनुज की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद सिविल सेवा की राह चुनी और कड़ी मेहनत के दम पर शीर्ष स्थान हासिल किया.
अनुज अग्निहोत्री ने एम्स जोधपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है. पढ़ाई के दौरान ही उनका रुझान मेडिकल क्षेत्र से हटकर सिविल सेवाओं की ओर हो गया था. इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर दिया. इससे पहले भी वे यूपीएससी परीक्षा पास कर चुके थे और डीएएनआईसीएस कैडर में सेवाएं दे चुके हैं.
मां ने बताया बेटे की सख्त दिनचर्या
अनुज की मां मंजू अग्निहोत्री ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा, “वह उसकी मेहनत है और भगवान की कृपा को ही मैं सबसे बड़ी बात मानती हूं. बाकी तो अपनी तरफ से हर मां जो करती है, वही मैंने भी किया. इसमें कोई अलग से खास बात नहीं है.”
उन्होंने आगे कहा, “इसकी दिनचर्या ऐसी थी कि यह सुबह 6 बजे उठ जाता था, फिर नाश्ता करता और पूरा काम बिल्कुल तय समय और नियमित दिनचर्या के अनुसार करता था. इसी वजह से मुझे भी कहीं जाना नहीं होता था, क्योंकि अगर इसका थोड़ा सा भी समय इधर-उधर हो जाता तो इसे दिक्कत होती.”
मंजू अग्निहोत्री ने बताया कि अनुज पढ़ाई के दौरान काफी अनुशासित रहता था और किसी तरह की बाधा पसंद नहीं करता था.
उन्होंने कहा, “यह बहुत कम लोगों से मिलता-जुलता था. यहां तक कि हम लोग आमने-सामने रहते हुए भी ज्यादा बातचीत नहीं करते थे. वह अपने कमरे में अलग बैठकर पढ़ाई करता था. हम लोग बस इतना ध्यान रखते थे कि उसे कोई भी परेशान न करे. इसलिए न मैं कहीं जाती थी और न ही घर पर किसी का ज्यादा आना-जाना होता था.
उन्होंने आगे कहा, “टॉप करने की बात तो पहले से नहीं कही जा सकती, क्योंकि इस परीक्षा में बहुत अनिश्चितता होती है. लेकिन इसकी मेहनत देखकर हमेशा लगता था, और मैं हमेशा कहती भी थी कि यह आगे चलकर जरूर कुछ बड़ा करेगा.”
तीसरे प्रयास में हासिल की पहली रैंक
अनुज अग्निहोत्री ने अपनी सफलता के बारे में बताते हुए कहा, “जब एमबीबीएस में अपना ग्रेजुएशन कर रहा था, उसी दौरान मेरा रुझान मेडिकल साइंस की जगह सिविल सेवाओं की ओर हो गया. तभी मैंने सोचा था कि मुझे सिविल सर्विस में जाना है. आगे 2023 में मेरा पहला प्रयास था, जिसमें मुझे DANICS सेवा मिली थी. यह मेरा तीसरा प्रयास है, इसलिए मेरी यह एक लंबी यात्रा रही है.”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने 2017 बैच में AIIMS जोधपुर से एमबीबीएस किया है. जब मैं इंटर्नशिप कर रहा था, तब अपनी प्रैक्टिस के साथ-साथ तैयारी के लिए मैंने एक ऑनलाइन कोर्स लिया था. उसके बाद मैंने घर पर रहकर ही अपनी तैयारी जारी रखी.”
परिवार का मिला मजबूत साथ
अनुज अग्निहोत्री ने अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने परिवार को दिया है. उनका कहना है कि लंबी तैयारी के दौरान परिवार का सहयोग बहुत जरूरी होता है. उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि इसमें मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि उन्होंने हमेशा एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बनाए रखा. यह एक लंबी यात्रा होती है, इसलिए स्वाभाविक है कि एक मजबूत सहारा बहुत जरूरी होता है. इसका पूरा श्रेय मैं अपने परिवार को देना चाहता हूं. मेरे पिताजी न्यूक्लियर पावर प्लांट में कर्मचारी हैं और माताजी गृहिणी हैं.”
पहली रैंक को बताया भाग्य और मेहनत का मेल
अनुज ने कहा कि यूपीएससी जैसी परीक्षा में पहली रैंक की उम्मीद पहले से तय नहीं की जा सकती. उन्होंने इसे मेहनत के साथ-साथ भाग्य का भी परिणाम बताया. उन्होंने कहा, “पहली रैंक की उम्मीद कोई भी पक्के तौर पर नहीं लगा सकता, क्योंकि यह ऐसा परीक्षा है जिसमें काफी विषयगतता होती है, इसलिए पहली रैंक कहीं न कहीं भाग्य की बात भी होती है. लेकिन जो भी अभ्यर्थी परीक्षा देता है, खासकर जब वह साक्षात्कार तक पहुंचता है, तो उसके मन में उम्मीद जरूर होती है.”