आज के दौर में किसी भी नेता के छोटे से कदम या बयान पर मीडिया की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों दिखती है? अगर वही काम कोई विपक्ष का नेता करता, तो क्या वही चुप्पी रहती या फिर हर चैनल पर बहस छिड़ जाती?
राजनीति में निष्पक्षता की बात अक्सर होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में धारणा कुछ और ही बनती जा रही है। जनता अब सिर्फ घटनाओं को नहीं, बल्कि उनके कवरेज को भी ध्यान से देख रही है।
सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं है—सवाल है मापदंड (standards) का।
क्या सभी नेताओं के लिए एक ही पैमाना लागू होता है, या फिर परिस्थितियों के हिसाब से बदल जाता है?
