News by Azam lala
भोपाल में उस वक़्त सनसनी फैल गई जब बेरसिया क्षेत्र के भोजपुर कला निवासी अशोक नामदेव अपने परिवार के साथ कथित तौर पर आत्महत्या करने की नीयत से यूनियन कार्बाइड चौराहे के पास स्थित पानी की टंकी के नज़दीक पहुंच गए। मामला दोपहर लगभग तीन बजे का बताया जा रहा है।
बताया जाता है कि समय रहते स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई, जिसके बाद गौतम नगर थाना में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी रोहित दुबे तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सूझबूझ और समझदारी का परिचय देते हुए अशोक नामदेव और उनके परिजनों को समझाइश दी तथा किसी भी अप्रिय घटना को होने से पहले ही टाल दिया। बाद में परिवार को सुरक्षित उनके घर रवाना कर दिया गया।

आखिर क्यों उठाना पड़ा इतना बड़ा कदम?
अशोक नामदेव का आरोप है कि उनके पास लगभग पांच एकड़ जमीन का पट्टा था, जिसे प्रशासनिक स्तर पर निरस्त कर दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया। नामदेव का कहना है कि यह कार्रवाई पटवारी और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से की गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर वर्षों से उनका कब्जा और खेती रही, उसी भूमि के अधिकार उनसे छीनकर दूसरे पक्ष को दे दिए गए। नामदेव का दावा है कि संबंधित पक्ष के पास पहले से ही पर्याप्त कृषि भूमि मौजूद है, इसके बावजूद सरकारी पट्टे का लाभ उन्हें दिया गया।
हत्या के पुराने मामले का भी जिक्र :
अशोक नामदेव ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में उनके पिता की हत्या हुई थी और उस मामले से जुड़े लोगों को ही अब उनकी जमीन का लाभ मिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों पर सुनवाई नहीं करने का आरोप :
नामदेव का कहना है कि उन्होंने पटवारी, एसडीएम, तहसील कार्यालय और कलेक्टर स्तर तक अनेक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई और न ही भूमि विवाद का समाधान हुआ। उनका कहना है कि उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं और प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा।
मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार :
अशोक नामदेव ने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंचेगी और उन्हें न्याय मिलेगा। उनका कहना है कि यदि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और जमीन संबंधी विवाद का समाधान नहीं निकला, तो उनका परिवार फिर किसी बड़े कदम के लिए मजबूर हो सकता है।

बड़ा सवाल :
यह पूरा घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि किसी नागरिक को अपनी बात सुनाने और न्याय की मांग करने के लिए आत्महत्या जैसे कदम की चेतावनी देनी पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
हालांकि मामले के सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है। राजस्व रिकॉर्ड, पट्टे की वैधता, भूमि आवंटन की प्रक्रिया तथा शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक पड़ताल के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आ सकेगी।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि पुलिस की तत्परता और समझदारी के कारण एक संभावित बड़ी घटना टल गई। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन अशोक नामदेव की शिकायतों की कितनी गंभीरता से जांच करता है और क्या लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा यह परिवार अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर पाता है या नहीं।
नोट: इस रिपोर्ट में शामिल आरोप प्रत्यारोप किसान नाम देव के है न्यूज 100 इन आरोप की पुष्टि नहीं करता |
