नई दिल्ली/सागर। बुंदेलखंड की पारंपरिक युद्ध कला और लोक संस्कृति को नई पहचान दिलाने वाले स्वर्गीय भगवान दास रैकवार (दाऊ) को मरणोपरांत पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनके योगदान को नमन करते हुए यह सम्मान प्रदान किया। दाऊ की ओर से उनके पुत्र राजकुमार रैकवार ने पुरस्कार ग्रहण किया।

सागर जिले के रहने वाले भगवान दास रैकवार ने अपना पूरा जीवन बुंदेली अखाड़ा पद्धति, पारंपरिक लाठी कला, तलवारबाजी और लोक संस्कृति के संरक्षण को समर्पित कर दिया। जिस समय यह प्राचीन मार्शल आर्ट धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही थी, उस समय उन्होंने इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया।
दाऊ ने हजारों युवाओं और बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देकर न केवल इस कला को जीवित रखा, बल्कि उन्हें अनुशासन, आत्मरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ा। उनके कई शिष्यों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बुंदेली संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
इस सम्मान की घोषणा के बाद सागर सहित पूरे बुंदेलखंड में खुशी की लहर दौड़ गई। कला प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने इसे केवल भगवान दास रैकवार का नहीं, बल्कि पूरी बुंदेली संस्कृति और अखाड़ा परंपरा का सम्मान बताया।
पुरस्कार ग्रहण करने के बाद राजकुमार रैकवार ने कहा कि यह सम्मान उनके पिता की दशकों की तपस्या और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि दाऊ की विरासत और बुंदेली मार्शल आर्ट को आगे भी नई पीढ़ियों तक पहुंचाया जाता रहेगा।
