मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच एक नई अंतरराष्ट्रीय विवाद की स्थिति उस समय पैदा हो गई, जब Israel ने Gaza Strip की ओर बढ़ रहे मानवीय सहायता बेड़े को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोक दिया। इस बेड़े में 20 से अधिक जहाज शामिल थे, जिनमें बड़ी मात्रा में भोजन, दवाइयां और राहत सामग्री लदी हुई थी। यह बेड़ा गाजा में जारी मानवीय संकट को देखते हुए वहां की जनता तक जरूरी मदद पहुंचाने के उद्देश्य से भेजा गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली नौसेना ने इस पूरे काफिले को रास्ते में ही रोक दिया और कार्रवाई करते हुए करीब 175 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इन कार्यकर्ताओं में पर्यावरण कार्यकर्ता Greta Thunberg, कुछ सांसद और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल थे, जो इस मिशन का हिस्सा बने थे। बाद में इजरायल ने इन सभी को रिहा कर Crete वापस भेज दिया, हालांकि सहायता सामग्री और जहाज अब भी इजरायली नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।
यह बेड़ा गाजा पर लंबे समय से लागू नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इजरायल का कहना है कि यह नाकेबंदी पूरी तरह कानूनी है और सुरक्षा कारणों से जरूरी है, क्योंकि गाजा क्षेत्र को उसने “सक्रिय युद्ध क्षेत्र” घोषित कर रखा है। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, बिना अनुमति इस क्षेत्र की ओर बढ़ने वाले किसी भी जहाज को रोकना उनकी सुरक्षा नीति का हिस्सा है, ताकि हथियारों या अन्य प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी को रोका जा सके।
हालांकि, इस कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। Colombia ने विरोध जताते हुए इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी, जो इस मुद्दे पर एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। वहीं Turkey ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” करार देते हुए कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि गाजा पहले से ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है, जहां लाखों लोग भोजन, दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में राहत सामग्री को रोकना वहां की स्थिति को और बदतर बना सकता है।
यह घटना एक बार फिर गाजा में जारी संकट और उस पर वैश्विक राजनीति के टकराव को उजागर करती है। एक ओर इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच की मांग कर रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक गरमाने की संभावना है, और इससे क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ सकता है।
न्यूज़ बाय
रज़ा लाला ख़ान
