Donald Trump की नीतियों पर बवाल, क्या US से निकाले जाएंगे अमेरिकी सैनिक?
अमेरिका की मध्यस्थता और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिवसीय युद्धविराम लागू हो गया है। 9 मई से शुरू हुआ यह युद्धविराम 11 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा। यह अवधि रूस के “विजय दिवस” समारोह के दौरान रखी गई है, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में मनाया जाता है। लंबे समय से जारी भीषण संघर्ष के बीच इस अस्थायी युद्धविराम को युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में राहत की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
समझौते के तहत दोनों देशों ने सैन्य हमलों, भारी गोलाबारी और ड्रोन हमलों पर अस्थायी रोक लगाने पर सहमति जताई है। युद्धविराम लागू होने के बाद कई सीमावर्ती इलाकों में हालात अपेक्षाकृत शांत बताए जा रहे हैं, हालांकि दोनों पक्षों की सेनाएं सतर्क स्थिति में बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि युद्धविराम का पालन कितनी गंभीरता से किया जा रहा है।
इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा युद्धबंदियों की अदला-बदली को माना जा रहा है। रूस और यूक्रेन ने कुल 2,000 कैदियों को रिहा करने पर सहमति दी है, जिसमें दोनों देशों के 1,000-1,000 युद्धबंदी शामिल हैं। लंबे समय से अपने परिजनों की वापसी का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए यह राहत भरी खबर है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध के बीच सबसे अहम काम अपने नागरिकों और सैनिकों को सुरक्षित घर वापस लाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कदम आगे स्थायी शांति की दिशा में सकारात्मक माहौल तैयार करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम को युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत बताया है। ट्रंप ने कहा कि यह “अंत की शुरुआत” हो सकती है और दोनों देशों को अब स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन लगातार दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि कई यूरोपीय देश भी शांति वार्ता को समर्थन दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि यह युद्धविराम अस्थायी है, लेकिन इससे भविष्य की व्यापक शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है। पिछले कई महीनों में संघर्ष ने भारी जनहानि, आर्थिक नुकसान और मानवीय संकट पैदा किया है। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और कई शहरों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है।
हालांकि अभी भी स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच अविश्वास और कई जटिल मुद्दे बरकरार हैं। इसके बावजूद युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली को मानवीय और कूटनीतिक स्तर पर बड़ी प्रगति माना जा रहा है। अब दुनिया की नजरें आने वाले दिनों की शांति वार्ताओं पर टिकी हैं कि क्या यह पहल स्थायी समाधान का आधार बन पाएगी या नहीं।
न्यूज़ बाय
रज़ा लाला ख़ान
News100 के लिए
