NEWS BY ARVIND TIWARI
रीवा। रीवा जिले के गंगेव जनपद स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हिनौती में लंबे समय से छात्रों और शिक्षकों के लिए खतरा बनी बिजली लाइन को आखिरकार हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विद्यालय परिसर के बीच से गुजर रही लो-टेंशन (एलटी) बिजली लाइन और झूलते तारों को अब परिसर से बाहर शिफ्ट किया जा रहा है। इस कार्रवाई से करीब 700 विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने विद्यालय परिसर में मौजूद बिजली लाइन से छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए और मामले को प्रमुखता से संबंधित विभागों के समक्ष रखा। इसके बाद बिजली विभाग सक्रिय हुआ और लाइन शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
वर्षों से बना हुआ था हादसे का खतरा
विद्यालय परिसर के बीचों-बीच से गुजर रही बिजली लाइन लंबे समय से छात्रों और शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई थी। खुले और नीचे लटकते तारों के कारण हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती थी। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती थी, जब बिजली के खंभों और तारों के संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता था।
विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस समस्या को लेकर वर्षों से शिक्षा विभाग और बिजली विभाग को कई बार लिखित शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
बिजली विभाग ने शुरू कराया लाइन शिफ्टिंग का काम
मामले की गंभीरता को देखते हुए त्योंथर विद्युत संभाग के कार्यपालन अभियंता आशीष बैन, सहायक यंत्री उमाशंकर द्विवेदी तथा कनिष्ठ यंत्री प्रणव वर्मा के निर्देशन में लाइन शिफ्टिंग का कार्य शुरू कराया गया। विभाग की ओर से नियुक्त ठेकेदार विद्यालय परिसर के भीतर से गुजर रही बिजली लाइन को हटाकर अब स्कूल की बाउंड्री के बाहर से नई लाइन बिछा रहा है।
विभाग का उद्देश्य है कि भविष्य में छात्रों और शिक्षकों को किसी प्रकार का विद्युत जोखिम न रहे और विद्यालय का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सके।
शिक्षकों और अभिभावकों ने जताई राहत
विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि बिजली लाइन के कारण स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी रहती थी। कई बार छात्र खेलते समय बिजली के खंभों और तारों के बेहद करीब पहुंच जाते थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी।
अभिभावकों ने भी इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान दिया है। उनका कहना है कि विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रदेशभर में सर्वे की उठाई मांग
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कहा कि केवल हिनौती ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई सरकारी विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों में आज भी हाईटेंशन और लो-टेंशन बिजली लाइनें परिसर के भीतर से गुजर रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि स्कूल शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के संयुक्त समन्वय से ऐसे सभी संस्थानों का व्यापक सर्वे कराया जाए और जहां भी खतरा हो, वहां प्राथमिकता के आधार पर बिजली लाइनों को हटाया जाए।
उन्होंने बताया कि उनके प्रयासों से हिनौती के अलावा करहिया, अतरैला, पताई सहित आसपास के कई विद्यालय परिसरों से भी पहले बिजली लाइनें हटाई जा चुकी हैं।
छात्रों की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता
विद्यालय परिसर से बिजली लाइन हटने के बाद अब छात्रों के लिए खेलकूद, प्रार्थना सभा और अन्य गतिविधियां पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित वातावरण में संचालित हो सकेंगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह कदम केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे प्रदेश के उन शैक्षणिक संस्थानों में भी ऐसी कार्रवाई की जानी चाहिए जहां बिजली की लाइनें छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं।
इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र के लोगों ने बिजली विभाग की पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी जनसुरक्षा से जुड़े मामलों पर इसी तरह त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

