गोरखपुर में मुकद्दस रमजान के महीने की रौनकों के बीच ईद से पहले बाजार महके हुए हैं. बाजार में इत्र-तस्बीह-जानमाज की 30% तक डिमांड बढ़ गई है. खास तौर पर अल्कोहल फ्री सेंट लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
माह-ए-रमजान का मुकद्दस महीना अपनी पवित्रता से घर-आंगन ही नहीं, बाजारों की शान भी बढ़ा रहा है. खजूर, तस्बीह, जानमाज, देश-विदेश की टोपियां, मिसवाक, सुर्मा और फिजा को महकाने वाले इत्र की खुशबू से बाजार इन दिनों खिलखिला रहे हैं. इन सभी सामानों की खूब डिमांड देखने मिल रही है.
एल्कोहल फ्री इत्र को जमकर खरीद रहे रोजेदार
रोजेदार नमाज और इबादत के दौरान ऐसे इत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें अल्कोहल का उपयोग न हो. धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए लोग प्राकृतिक और बिना अल्कोहल वाले इत्र व सेंट खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
शहर में सुबह से रात तक उमड़ रही ग्राहकों की भीड़
शहर के नखास, घंटाघर, रेती चौक और गोलघर इलाके की दुकानों पर सुबह से देर रात तक ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है. दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार करीब बीस से तीस प्रतिशत तक बिक्री बढ़ी है. खासकर ओउद, मोगरा, गुलाब, चंदन और अंबर जैसी खुशबुओं की मांग ज्यादा है. कई दुकानों पर मध्य पूर्व से आयातित इत्र भी उपलब्ध हैं, जिन्हें ग्राहक विशेष रूप से पसंद कर रहे हैं.
युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक खूब बिक रहा इत्र
रोजा रखने वाले लोग इफ्तार और तरावीह की नमाज से पहले इत्र लगाना पसंद करते हैं. युवा वर्ग जहां मॉडर्न पैकिंग वाले सेंट खरीद रहा है, वहीं बुजुर्ग पारंपरिक शीशियों में मिलने वाले इत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं. दुकानदार ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष छूट और ऑफर भी दे रहे हैं.
बढ़ती मांग के बीच खिले कारोबारियों के चेहरे
रमजान के अवसर पर इत्र की बढ़ती मांग से कारोबारियों के चेहरे खिले हुए हैं. बाजारों की रौनक यह दर्शा रही है कि रमजान न केवल आध्यात्मिक उत्साह का पर्व है, बल्कि स्थानीय व्यापार के लिए भी नई ऊर्जा लेकर आता है.
इत्र विक्रेता ने क्या कहा?
नखास स्थित इत्र के विक्रेता अख्तर आलम ने बताया कि अल्कोहल फ्री सेंट में मैग्नेट, नाजनीन, शनाया, ब्लू वेव की मांग ज्यादा है. वहीं, माई चॉइस, खामरा भी पसंद किए जा रहे हैं. इनके दाम 40 रुपये से एक हजार तक हैं. वहीं, इत्र 10 रुपये से लेकर पांच हजार के दाम में उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि यह इत्र मुंबई, लखनऊ, कानपुर, कन्नौज और कोलकाता आदि से मंगाए जा रहे हैं.
खुशबू न हो तो रमजान व ईद अधूरी- आसिफ महमूद
जमुनहिया बाग के आसिफ महमूद ने बताया कि रमजान व ईद के मद्देनजर बाजार में इत्र की भी खूब मांग है. इत्र की दुकानें भी इन दिनों गुलजार हैं. गुलाब, शमामा, गुलहिना, चंदन, बेला, चमेली, स्ट्रॉबेरी इत्र बाजार में दस्तयाब हैं लेकिन इत्र के शौकीन लोग व्हाइट मुश्क, मैग्नेट, कोबरा, जन्नतुल फिरदौस, मजमुआ, अतरफुल, नाजनीन, ब्लू वेव, आइस बर्ग को दुकान से दुकान तलाश कर खरीद रहे हैं.
रोजेदार इन सुन्नतों का रखें खास ख्याल-कारी मुहम्मद अनस
कारी मुहम्मद अनस ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को चार चीजें बेहद महबूब थीं. जिसे आप कभी तर्क नहीं करतें थे। एक सुर्मा लगान, दूसरा इत्र लगाना, तीसरा इमामा शरीफ पहनना, चौथा मिसवाक करना. रमजान माह में रोजेदार इन प्यारी सुन्नतों का खास ख्याल रखते है. इन प्यारी सुन्नतों से रोजदारों की रूह को सुकून व इबादत में ताजगी मिलती है. इनका इस्तेमाल करने वालों के लिए अल्लाह के फरिश्ते दुआएं करते है.
मिस्वाक के इस्तेमाल पर क्या बोले हाफिज रहमत अली
हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि रमजान माह में रोजेदार मिसवाक (दातुन) बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं. हदीस में है कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि मिसवाक का इस्तेमाल अपने लिए लाजिम कर लो क्योंकि इसमें मुंह की पाकीजगी और अल्लाह की खुशनूदी है.
मौलाना महमूद रजा कादरी ने दिया हदीस का हवाला
मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सरे अकदस के मुकद्दस बालों और दाढ़ी मुबारक पर मुश्क लगाते थे. हदीस शरीफ में यह भी आया है कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुशबू का तोहफा रद्द नहीं फरमाते थे. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया तीन चीजें कभी नहीं लैाटानी चाहिए तकिया, खुशबूदार तेल, और दूध.
रोजे में सुर्मा लगाने पर क्या बोले मौलाना?
मुफ्ती मेराज ने बताया कि सुर्मा लगाना पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम हमेशा सरे अक्दस पर अपनी मुबारक टोपी पर इमामा मुबारक को सजाकर रखा. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इमामा की तरफ इशारा करके फरमाया फरिश्तों के ताज ऐसे ही होते हैं. बेशक अल्लाह और उसके फरिश्ते जुमा के इमामा वालों पर दुरूद भेजते हैं.
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