भोपाल के मिसरोद और समरधा के दरमियान उससी वक़्त अफ़रा-तफ़री का मंज़र पैदा हो गया, जब एक दौड़ते हुए डंपर में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते धुएँ के ग़ुब्बार आसमान की तरफ उठने लगे और सड़क पर मौजूद लोगों में ख़ौफ़-ओ-हिरास फैल गया।
इब्तिदाई मालूमात के मुताबिक़, शदीद गर्मी, लंबा सफ़र और इंजन के हद से ज़्यादा गर्म हो जाने की वजह से आग लगने का इमकान ज़ाहिर किया जा रहा है। हालांकि यह इमकान भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा रहा कि डंपर में कोई आतिशगीर (ज्वलनशील) मवाद लदा हो, जिसकी वजह से शोले भड़क उठे।
वाक़िये की इत्तिला मिलते ही पुलिस और दमकल अमला हरकत में आया। आग पर क़ाबू पाने की कोशिशें की गईं और ट्रैफ़िक को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। ख़ुशक़िस्मती से किसी जानी नुक़सान की इत्तिला सामने नहीं आई, लेकिन डंपर को काफ़ी नुकसान पहुँचा।
पुलिस इस अम्र की तहक़ीक़ात कर रही है कि आग महज़ गर्मी और इंजन की ख़राबी का नतीजा थी या फिर डंपर में मौजूद किसी ख़तरनाक मवाद ने इस हादसे को जन्म दिया।
इस वाक़िये ने एक बार फिर दमकल महकमे की सुस्ती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब भी ऐसे हादसात पेश आते हैं, फायर ब्रिगेड को बार-बार इत्तिला देना पड़ता है और अक्सर मौके पर पहुँचने में ताख़ीर देखने को मिलती है। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि अगर आग आबादी वाले इलाके तक फैल जाती, तो ज़िम्मेदारी किस पर तय होती?
फिलहाल पुलिस हर पहलू से तहक़ीक़ात में मशग़ूल है और आग लगने की असल वजह का पता लगाया जा रहा है। यह हादसा सिर्फ़ एक डंपर के जलने तक महदूद नहीं, बल्कि इमरजेंसी इंतज़ामात की हक़ीक़त को भी बेनक़ाब करता है।
