देशभर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से आज से नए नियम लागू हो गए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ड्राइविंग लाइसेंस (DL) प्राप्त करने के लिए हर आवेदक को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में जाकर ड्राइविंग टेस्ट देना अनिवार्य नहीं होगा। सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी अब ड्राइविंग टेस्ट आयोजित कर सकेंगे और सफल उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र जारी करेंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई आवेदक अधिकृत ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर निर्धारित ड्राइविंग टेस्ट सफलतापूर्वक पास कर लेता है, तो उसे संबंधित संस्थान की ओर से एक प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे आवेदकों को बार-बार आरटीओ कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और लाइसेंस प्राप्त करने में लगने वाला समय भी कम होगा।
सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनेगी। वर्तमान में कई आरटीओ कार्यालयों में लंबी प्रतीक्षा सूची और अत्यधिक भीड़ की समस्या देखने को मिलती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन कार्यालयों पर कार्यभार कम होने की संभावना है, जिससे अन्य परिवहन सेवाओं के संचालन में भी सुधार आ सकता है।
हालांकि ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है, लेकिन लाइसेंस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया पहले की तरह ऑनलाइन ही रहेगी। आवेदकों को अपना आवेदन, दस्तावेजों का सत्यापन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं सारथी पोर्टल के माध्यम से पूरी करनी होंगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लाइसेंस जारी किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के साथ ड्राइविंग प्रशिक्षण प्रदान करते हैं, तो इससे सड़क सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रशिक्षित और नियमों की बेहतर समझ रखने वाले चालक सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सरकार का दावा है कि यह नई व्यवस्था ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाएगी। साथ ही इससे समय की बचत होगी और आम लोगों को सरकारी कार्यालयों में होने वाली अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सकेगी। यह बदलाव देश की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
