संवाददाता : Azam lala
मध्यप्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर तेजी से उभरते पीथमपुर ने एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। हेलियन ग्रुप ने भारत में अपनी पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए यहां आधारशिला रख दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से भूमिपूजन कर इस परियोजना को प्रदेश के औद्योगिक भविष्य के लिए “एक निर्णायक कदम” बताया।
करीब 2000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मेगा प्रोजेक्ट केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि रोजगार, तकनीक और वैश्विक निवेश के नए दौर का संकेत माना जा रहा है। लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह संयंत्र दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा हेलियन प्लांट बताया जा रहा है, जहां फार्मा और मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अत्याधुनिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बल
परियोजना से सीधे तौर पर 1000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन, पैकेजिंग, सप्लाई चेन, होटल, रिटेल और सेवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में अवसर पैदा होंगे। उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जाएगा।
महिला रोजगार को लेकर भी कंपनी ने विशेष रणनीति बनाई है। उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान और प्रशासनिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक बाजार तक पहुंचेगा ‘मेड इन मध्यप्रदेश’
हेलियन ग्रुप द्वारा यहां तैयार किए जाने वाले उत्पादों का निर्यात एशिया, मध्य-पूर्व और अफ्रीकी देशों तक किया जाएगा। इससे न केवल कंपनी की वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि मध्यप्रदेश की औद्योगिक पहचान भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और सशक्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मा और मेडिकल उपकरण निर्माण के क्षेत्र में यह निवेश राज्य को नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देगा। कोविड-19 के बाद वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य अवसंरचना और चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला को लेकर बढ़ी मांग के बीच इस तरह की परियोजनाएं रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
सरकार की निवेश नीति को मिला बड़ा समर्थन
राज्य सरकार लंबे समय से पीथमपुर, इंदौर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने पर काम कर रही है। सड़क, बिजली, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना में सुधार के प्रयासों का असर अब बड़े निवेश प्रस्तावों के रूप में दिखाई देने लगा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल, तेज अनुमतियां और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परियोजना प्रदेश में विदेशी और घरेलू निवेशकों के विश्वास को और मजबूत करेगी।
पीथमपुर को मिलेगी नई पहचान
अब तक ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए प्रसिद्ध पीथमपुर को इस परियोजना से फार्मा और मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में नई पहचान मिलने की संभावना है। औद्योगिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परियोजना तय समयसीमा में पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य-उद्योग निवेश का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
सरकारी हलकों में इस पहल को केवल एक फैक्ट्री की स्थापना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विस्तार के नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
