घाघरला–डालमहू मार्ग पर हर साल बनते हैं बाढ़ जैसे हालात, ग्रामीण बोले— पुल की ऊंचाई बढ़े तभी मिलेगा स्थायी समाधान
बुरहानपुर | रिपोर्ट: राजू सिंह राठौड़
बुरहानपुर जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। इसी बीच जिले के घाघरला और डालमहू गांव के बीच स्थित पुल से सामने आई तस्वीरों ने ग्रामीण क्षेत्रों की जमीनी समस्याओं को फिर उजागर कर दिया है। शुक्रवार शाम तेज बारिश के बाद पुल के ऊपर से पानी बहने लगा, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते बहाव के बीच पुल पार करते दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान यही स्थिति बनती है और कुछ घंटों की तेज बारिश के बाद पुल पूरी तरह पानी में डूबने जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। इससे ग्रामीणों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से बाधित हो जाता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई ग्रामीण दोपहिया वाहन लेकर और कुछ पैदल ही तेज बहाव के बीच पुल पार करते दिखाई दिए। पानी का दबाव इतना अधिक था कि किसी भी समय संतुलन बिगड़ने से बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बावजूद मजबूरी और आवागमन के सीमित विकल्पों के कारण लोगों को जोखिम उठाना पड़ा।
ग्रामीण हरिओम ने बताया कि सड़क निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन पुल की ऊंचाई पर्याप्त नहीं रखी गई। परिणामस्वरूप थोड़ी अधिक बारिश होने पर पानी सीधे पुल के ऊपर बहने लगता है और क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। उन्होंने कहा कि इससे केवल आवाजाही प्रभावित नहीं होती, बल्कि कई बार लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दौरान सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को होती है। कई बार लोगों को घंटों तक पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है, जबकि आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय निवासी नेमीदास का कहना है कि यदि पुल की ऊंचाई लगभग पांच फीट बढ़ा दी जाए तो पानी का बहाव नीचे से निकल सकेगा और पुल के ऊपर जलभराव की स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हो सकती है। उनका कहना है कि वर्तमान पुल कई वर्षों पुराना हो चुका है और इसकी संरचना अब बढ़ते जलप्रवाह के अनुरूप नहीं रह गई है।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में नए सड़क मार्गों पर काम हुआ है, लेकिन पुराने पुल के पुनर्निर्माण की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई। केवल मरम्मत के सहारे व्यवस्था चल रही है, जिससे हर मानसून में यही संकट दोहराया जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि क्षेत्र की जरूरत और सुरक्षा को देखते हुए पुराने पुल की जगह नया, मजबूत और अधिक ऊंचाई वाला पुल बनाया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
फिलहाल उफनते नाले के बीच जान जोखिम में डालकर पुल पार करते लोगों की तस्वीरें ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और मानसून पूर्व तैयारियों पर कई सवाल खड़े कर रही हैं।
अपील: प्रशासन और नागरिकों से अनुरोध है कि तेज बहाव या पुल के ऊपर पानी होने की स्थिति में जोखिम न लें और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होने तक प्रतीक्षा करें।
