भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के लाखों धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए धान की फसल को भी भावांतर भुगतान योजना के दायरे में शामिल करने की घोषणा की है। अब यदि किसानों को मंडी में धान का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम मिलता है, तो सरकार निर्धारित नियमों के तहत मूल्य अंतर की भरपाई करेगी। इस निर्णय से विशेष रूप से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पाती।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित रखना और उन्हें फसल का बेहतर मूल्य दिलाना है। अब धान उत्पादकों को बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में आर्थिक नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे किसानों में धान उत्पादन को लेकर विश्वास भी बढ़ेगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
भावांतर भुगतान योजना के तहत किसानों को अपनी उपज निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीकृत मंडियों में बेचना होगा। बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच यदि अंतर होता है तो पात्र किसानों के बैंक खातों में अंतर की राशि सीधे हस्तांतरित की जाएगी। योजना के संचालन और पात्रता संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश सरकार जल्द जारी करेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य के धान उत्पादक किसानों को बड़ा आर्थिक संबल मिलेगा। साथ ही यह कदम कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। सरकार को उम्मीद है कि योजना लागू होने से किसानों का आर्थिक जोखिम कम होगा और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।
