राजू सिंह राठौड़
2-3 वर्षों से जर्जर हालत में पोस्टमार्टम कक्ष, आवारा पशुओं और जंगली जानवरों के हमले का बना रहता है खतरा।
बुरहानपुर जिले के स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों के बीच नेपानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पोस्टमार्टम रूम बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। स्थिति यह है कि पोस्टमार्टम कक्ष में न तो दरवाजे हैं और न ही खिड़कियों की समुचित व्यवस्था, जिसके कारण यहां आने वाले शवों की सुरक्षा तक भगवान भरोसे है।

स्थानीय लोगों के अनुसार पोस्टमार्टम रूम की यह जर्जर स्थिति पिछले दो से तीन वर्षों से बनी हुई है, लेकिन अब तक सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालात इतने खराब हैं कि जब किसी शव को पोस्टमार्टम के लिए लाया जाता है, तब पुलिसकर्मियों या मृतक के परिजनों को शव के पास निगरानी के लिए तैनात रहना पड़ता है। डर इस बात का रहता है कि यदि कुछ देर के लिए भी शव को अकेला छोड़ दिया जाए तो आवारा पशु या जंगली जानवर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि मृतकों के सम्मान और संवेदनशील व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पोस्टमार्टम रूम की मरम्मत कर सुरक्षित एवं व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नेपानगर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. हिमांशु चौधरी ने बताया कि पोस्टमार्टम रूम की जर्जर स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। मामला उनके संज्ञान में है और अधिकारियों द्वारा जल्द समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया गया है।
बाइट : डॉ. हिमांशु चौधरी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नेपानगर
जहां मृतकों की गरिमा भी सुरक्षित नहीं, वहां स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल।
