News by Azam Lala
मध्यप्रदेश के सागर ज़िले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी ख़रीदी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत खरीदा गया गेंहू सुरक्षित रखने के लिए वेयरहाउस में जमा कराया गया था, लेकिन जब जांच टीम निरीक्षण के लिए पहुंची तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
तहक़ीक़ात के दौरान कुछ बोरियों में गेंहू की जगह मिट्टी भरी मिली। इस खुलासे के बाद पूरे मामले को गंभीर आर्थिक गड़बड़ी और सरकारी अमानत में ख़यानत के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह कोई साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था को चूना लगाने की सोची-समझी साज़िश हो सकती है।
मामले के सामने आते ही वेयरहाउस समिति से जुड़े तीन लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस कथित घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें किन-किन लोगों की मिलीभगत रही है।
सूत्रों के मुताबिक़ जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है ताकि यह भी स्पष्ट हो सके कि मिट्टी से भरी बोरियां कब और कैसे वेयरहाउस तक पहुंचीं तथा कहीं इस तरह की अनियमितता पहले भी तो नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी और सरकारी ख़रीदी प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।
किसानों की मेहनत की फ़सल और सरकारी धन से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर भंडारण व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे खेल के पीछे छिपे चेहरों से पर्दा उठा सकती है।
