मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन निरस्त किए जाने को दी चुनौती, हलफनामे में आपराधिक मामले की जानकारी न देने का है विवाद |
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता Meenakshi Natarajan द्वारा राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर Supreme Court of India 12 जून को सुनवाई करेगा। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
मामला मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल किए गए नामांकन पत्र से जुड़ा है। रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि उन्होंने अपने नामांकन के साथ प्रस्तुत हलफनामे में एक आपराधिक मामले की जानकारी का उल्लेख नहीं किया। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान इसे महत्वपूर्ण तथ्य मानते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया गया।
इस संबंध में भाजपा उम्मीदवार Mahesh Keval द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवार द्वारा चुनावी दस्तावेजों में आवश्यक जानकारी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके चलते निर्वाचन नियमों का उल्लंघन हुआ है।
नामांकन निरस्त किए जाने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Abhishek Manu Singhvi ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि जिस मामले का उल्लेख नहीं किया गया, उसमें केवल समन जारी हुआ था और कानून के अनुसार उस स्थिति में उसका खुलासा करना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने तर्क दिया कि नामांकन निरस्त करने का निर्णय कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्वाचन अधिकारियों द्वारा नियमों की गलत व्याख्या करते हुए नामांकन खारिज किया गया, जिससे उम्मीदवार के चुनाव लड़ने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। वहीं दूसरी ओर, शिकायतकर्ताओं का पक्ष है कि चुनावी हलफनामे में सभी प्रासंगिक जानकारियों का खुलासा किया जाना आवश्यक है, ताकि मतदाताओं और निर्वाचन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे।
अब इस पूरे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 12 जून को सुनवाई करेगा। अदालत के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई वैध थी या नहीं। इस मामले को राज्यसभा चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में से एक माना जा रहा है और इसके परिणाम पर राजनीतिक दलों की भी नजर बनी हुई है।
