राज्य सरकार ने लगभग ₹20,000 करोड़ से जुड़े स्मार्ट मीटर टेंडर को रद्द करने का फैसला लिया है, जो पहले अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस से जुड़ा बताया जा रहा था।
सरकार का कहना है कि बोली की लागत अन्य राज्यों की तुलना में अधिक थी, जिससे उपभोक्ताओं और बिजली विभाग पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता था। इसी आधार पर यह निर्णय लिया गया।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को भी हवा दे दी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि जनता के बीच स्मार्ट मीटर प्रणाली को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे बिजली क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम मानते हैं, तो कुछ को बिजली बिल बढ़ने की आशंका है।
इसी बीच तमिलनाडु की राजनीति को लेकर चल रही चर्चाओं में थलापति विजय का नाम भी लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। राज्य में हर बड़े राजनीतिक मुद्दे पर लोगों की नजर बनी हुई है।
अब राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि कृषि कनेक्शनों को छोड़कर पूरे राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने के लिए नया ग्लोबल टेंडर जारी किया जाएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और लागत प्रभावी साबित होती है।
