जा़हिद खान की रिपोर्ट
भोपाल। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा विभिन्न जिलों में निर्मित छात्रावासों के रिनोवेशन कार्यों में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले और अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों को लेकर मंगलवार को भोपाल में विभागीय कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया और प्रमुख अभियंता को लिखित शिकायत एवं दस्तावेज सौंपे गए।
यह प्रदर्शन भोपाल कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप मोनू सक्सेना के नेतृत्व में किया गया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ता और अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने लोक निर्माण विभाग का घेराव करते हुए आरोप लगाया कि रिनोवेशन कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।

कागजों में करोड़ों खर्च, जमीनी स्तर पर अधूरे काम का आरोप :
आरोपों के अनुसार छात्रावासों के रिनोवेशन के नाम पर कागजों में भारी-भरकम राशि खर्च दिखाई गई, जबकि वास्तविकता में कई स्थानों पर कार्य अधूरे पाए गए या गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया तथा फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है।
प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख अभियंता को विस्तृत शिकायत सौंपी। इसमें कार्य आदेश, भुगतान रिकॉर्ड, फोटोग्राफ और स्थल निरीक्षण से संबंधित दस्तावेज भी शामिल किए गए, जिन्हें जांच के लिए साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग :
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि रिनोवेशन कार्यों में हुई अनियमितताओं की वास्तविकता सामने आ सके। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों पर सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके अलावा यह भी मांग उठाई गई कि छात्रावासों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष स्थल सत्यापन समिति का गठन किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
आंदोलन की चेतावनी :
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर जांच शुरू नहीं की गई और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार :
फिलहाल लोक निर्माण विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत और दस्तावेजों के आधार पर जांच की संभावना जताई जा रही है।
पूरा मामला अब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिका हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

