News by Azam lala
यह घटना अपराध नहीं बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का मामला है, इसलिए इसे क्राइम स्टोरी की शैली में सनसनीखेज बनाने के बजाय हादसे और उसके सामाजिक पहलुओं के विश्लेषण के रूप में प्रस्तुतg करना अधिक उचित होगा।
जंगल से निकला खौफ़, दो बेगुनाह महिलाओं पर भालू का हमला
अनूपपुर। इतवार की सुबह ग्राम पंचायत धनगवां के पटपरिहा टोला में उस वक्त दहशत फैल गई जब जंगल से भटककर आबादी की तरफ आए एक भालू ने दो महिलाओं पर अचानक हमला कर दिया। सुबह की ख़ामोशी चीख़ों में तब्दील हो गई और पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मिली जानकारी के मुताबिक 35 वर्षीय गुड्डी कोल और 65 वर्षीय तिजिया कोल रोज़ाना की तरह सुबह घर से कुछ दूरी पर खेतों की तरफ गई थीं। इसी दौरान जंगल की ओर से आए एक भालू ने उन पर हमला बोल दिया। भालू के अचानक हमले से दोनों महिलाएं संभल भी नहीं पाईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं।
हमले में गुड्डी कोल की कमर में गंभीर चोटें आईं, जबकि वृद्धा तिजिया कोल के चेहरे, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे घाव हुए हैं। महिलाओं की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण बड़ी तादाद में मौके पर पहुंचे। लोगों के शोर-शराबे और हल्ला मचाने पर भालू वापस जंगल की ओर भाग गया।
घटना की खबर मिलते ही ग्राम पंचायत धनगवां के सरपंच संजय गोठिया मौके पर पहुंचे और तत्काल दोनों घायलों को फुनगा अस्पताल भिजवाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जिला चिकित्सालय अनूपपुर रेफर कर दिया।
इस घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से जंगली जानवरों की आवाजाही आबादी वाले इलाकों में बढ़ी है, जिससे ग्रामीणों में लगातार डर का माहौल बना हुआ है।
सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र प्रताप सिंह और उमेश अग्रवाल भी अस्पताल पहुंचे और घायलों के परिजनों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। वहीं वन विभाग के अधिकारियों को मामले से अवगत कराते हुए प्रभावित परिवारों को सहायता और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है।
यह हादसा केवल दो महिलाओं पर हुए हमले की कहानी नहीं है, बल्कि जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच लगातार कम होती दूरी की एक चिंताजनक तस्वीर भी पेश करता है। जब वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर आबादी तक पहुंचने लगें, तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि भविष्य के बड़े खतरे का संकेत माना जाता है।विश्लेषण: यह घटना बताती है कि अनूपपुर जैसे वन क्षेत्रों में मानव और वन्यजीवों का टकराव बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जंगलों में भोजन और आवास की कमी, वन क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप तथा आबादी का विस्तार ऐसे संघर्षों की प्रमुख वजह बनते जा रहे हैं।
