News by Azam lala
खेत वही था, जहां कभी फसलें लहलहाती थीं, जहां किसान अपनी मेहनत और उम्मीदें बोया करते थे। लेकिन इस बार मिट्टी ने अनाज नहीं, एक ऐसा राज छुपा रखा था जिसने पूरे गांव की रूह कंपा दी।
गांव वालों को कई दिनों से बदबू आ रही थी। किसी ने सोचा कोई जानवर मर गया होगा, किसी ने कहा शायद खेत में कोई गंदगी पड़ी होगी। मगर किसी को अंदाजा नहीं था कि उस दुर्गंध के पीछे एक इंसान की अधूरी कहानी दफन है।
जब बोरी खोली गई तो सिर्फ एक शव नहीं मिला, बल्कि कई सवाल बाहर निकल आए। सवाल भरोसे के, सवाल रिश्तों के, सवाल उस दर्द के जो शायद मरने से पहले उस युवक ने महसूस किया होगा।
कोमल वर्मा की मौत सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं है, बल्कि यह उस समाज का आईना भी है जहां कभी-कभी दुश्मन चेहरे से नहीं, मुस्कुराहटों के पीछे छिपे मिलते हैं। जिस इंसान के साथ कभी चाय पी गई हो, जिसके साथ खेतों की पगडंडियां नापी गई हों, वही कब दुश्मन बन जाए, कोई नहीं जानता।
इस घटना ने गांव में दहशत का ऐसा सन्नाटा छोड़ दिया है कि शाम होते ही लोग जल्दी घरों में सिमटने लगे हैं। बच्चों को अकेले बाहर जाने से रोका जा रहा है। हर चौपाल पर बस एक ही चर्चा है—”आखिर कोमल के साथ ऐसा किसने और क्यों किया?”
मजबूरी भी अजीब चीज होती है। कभी इंसान को खामोश रहने पर मजबूर करती है, कभी सच बोलने से रोक देती है। हो सकता है इस कहानी में भी कोई ऐसा सच छिपा हो जो अभी सामने नहीं आया है। कोई ऐसी रंजिश, कोई ऐसा धोखा या कोई ऐसा राज, जिसने एक जिंदगी को खत्म कर दिया।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि हर हत्या के बाद सिर्फ एक व्यक्ति नहीं मरता। उसके साथ उसके मां-बाप की उम्मीदें, भाई-बहनों की मुस्कुराहटें और परिवार के कई सपने भी दम तोड़ देते हैं।
दहशत की बात यह नहीं कि एक लाश बोरी में मिली। दहशत की बात यह है कि वह बोरी किसी इंसान ने भरी थी।
और यही सोचकर गांव के लोग सहमे हुए हैं कि कातिल कहीं दूर नहीं, शायद उन्हीं रास्तों पर चल रहा है जहां कल तक कोमल चला करता था।
खेतों में आज फसल नहीं, खामोशी उगी है,
किसी मां की आंखों में उम्र भर की नमी जगी है।
मिट्टी ने राज छुपाया था, बदबू ने बयान कर दिया,
एक लाश क्या मिली, पूरे गांव को हैरान कर दिया।
