News by Azam lala
भोपाल की फिज़ाओं में इन दिनों एक बार फिर सियासी हरारत महसूस की जा रही है। 31 मई को गाँधीनगर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर शहर का माहौल गरमाता नज़र आ रहा हैसी। एक तरफ़ कुछ लोग टी. राजा सिंह को “हिंदुत्व की बुलंद आवाज़” बताते हैं, तो दूसरी जानिब उनके पुराने बयानात को लेकर ख़ौफ़ और बेचैनी का इज़हार किया जा रहा है।
पुलिस कमिश्नर दफ़्तर पहुँचे आवेदन में साफ़ तौर पर कहा गया कि जिन शख़्सियत पर पहले भी मुल्क के मुख़्तलिफ़ हिस्सों में नफ़रत फैलाने, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने और भड़काऊ तक़रीरों के इल्ज़ाम लग चुके हों, उनके कार्यक्रम से भोपाल जैसे नाज़ुक मिज़ाज शहर की अमन-ओ-अमान की सूरत बिगड़ सकती है।
साल 2022 में पैगंबर मोहम्मद साहब पर दिए गए बयान के बाद हैदराबाद की सड़कों पर जो एहतिजाज भड़का, गिरफ्तारी, जमानत और फिर PD Act तक की कार्रवाई हुई, वो सब अभी भी लोगों के ज़ेहन में ताज़ा है। 2023 में रामनवमी जुलूस के दौरान दिए गए बयान भी विवादों में रहे। IPC 153-A जैसी धाराओं के तहत मुक़दमे दर्ज हुए।
