न्यूज़ बाय : रज़ा लाला ख़ान
ट्रंप का रुख: “अमेरिका फर्स्ट” नीति के तहत कतर जैसे देशों के जरिए ईरान से बातचीत करना और प्रतिबंधों में ढील देकर युद्ध को जल्द खत्म करना। नेतन्याहू का रुख: कूटनीति को समय की बर्बादी मानना और ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह खत्म करने के लिए तुरंत विनाशकारी हवाई हमले शुरू करना।
सीरिया और लेबनान: ट्रंप ने सीरिया पर प्रतिबंध बनाए रखने की इजरायली मांग खारिज की और लेबनान में बमबारी रोकने का संकेत दिया। सीमित आजादी: अमेरिका अब इजरायल को मध्य पूर्व में बिना शर्त खुलकर सैन्य कार्रवाई करने की आजादी (Free Hand) नहीं दे रहा है। ट्रंप का यह बयान कि नेतन्याहू “वही करेंगे जो मैं चाहूँगा”, इजरायली प्रधानमंत्री की राजनीतिक छवि और देश की संप्रभुता को चुनौती देता है।
तनावपूर्ण संबंध: मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी रुख से नेतन्याहू बेहद गुस्से में हैं, जो दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच गहरे मतभेद और भरोसे की कमी को दिखाता है। समझौते की कोशिश: इस ऐतिहासिक तनाव के बावजूद, दोनों देश वाशिंगटन में आगामी बैठक के जरिए बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करेंगे।
बड़ा जोखिम: यदि इजरायल ने अमेरिका की इच्छा के विरुद्ध एकतरफा हमला किया, तो यह दोनों देशों के कूटनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा संकट बन सकता है |
