“Stop Manipur From Burning” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि मई 2023 से लगातार सुलग रहे मणिपुर की चीख है। 7 मई 2026 को कामजोंग जिले में म्यांमार के उग्रवादी समूहों KNA(B) और PDF ने गांवों पर हमला कर घरों को आग लगा दी, जिससे साफ है कि अब हिंसा सिर्फ आंतरिक नहीं रही – ये “बाहरी आक्रमण” का रूप ले चुकी है। सुप्रीम कोर्ट शुरू से ही इस मामले में सख्त है। कोर्ट ने राज्य सरकार को कई बार फटकार लगाई कि “कानून-व्यवस्था ध्वस्त है”, CBI जांच और SIT गठन के आदेश दिए, फिर भी जमीन पर हालात नहीं बदले। असल पेंच ये है कि कोर्ट आदेश दे सकता है, पर अमल सरकार को करना है।
जब तक बॉर्डर सील नहीं होगा, हथियार सरेंडर नहीं होंगे और राजनीतिक संवाद शुरू नहीं होगा, तब तक कोर्ट की फटकार भी कागजों तक सीमित रहेगी। 2 साल में 200+ मौतें, 60 हजार बेघर और अब विदेशी उग्रवादियों की एंट्री – ये बताता है कि मणिपुर की आग सिर्फ पुलिस से नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति से बुझेगी। “Stop Manipur From Burning” अब केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा है।
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Sabiha khan
