उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के अभूतपूर्व उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है. 19 अप्रैल से यात्रा के आगाज के बाद से ही तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. यात्रा के लिए अनिवार्य पंजीकरण का आंकड़ा 20 लाख के पार पहुंच गया है, जो इस धार्मिक आयोजन की लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की आस्था को दर्शाता है.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यात्रा को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. श्रद्धालु ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीकरण कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया सरल और सुलभ हो गई है. पर्यटन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 6 मार्च से 21 अप्रैल तक चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब के लिए कुल 20 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं.
यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद मात्र तीन दिनों के भीतर 20 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं. यह संख्या आने वाले दिनों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है.
केदारनाथ धाम के लिए अब तक 7.23 लाख से अधिक पंजीकरण
अगर अलग-अलग धामों के लिए पंजीकरण आंकड़ों की बात करें, तो केदारनाथ धाम सबसे आगे है, जहां अब तक 7.23 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण कर चुके हैं. इसके बाद बदरीनाथ धाम के लिए 6.10 लाख, गंगोत्री धाम के लिए 3.61 लाख और यमुनोत्री धाम के लिए 3.51 लाख पंजीकरण दर्ज किए गए हैं. वहीं, हेमकुंड साहिब के लिए भी 21,867 श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं.
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चारधाम यात्रा हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. हिमालय की गोद में बसे ये चारों धाम, केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाते हैं. यहां दर्शन करने को जीवन का महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है.
यात्रा पर आने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं
सरकार और प्रशासन द्वारा यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और ठहरने की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही, श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे यात्रा पर आने से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराएं और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें. शुरुआती आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि इस वर्ष चारधाम यात्रा नए रिकॉर्ड बना सकती है. आस्था, उत्साह और बेहतर व्यवस्थाओं के संगम से यह यात्रा एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनती नजर आ रही है.
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