Study Abroad After 12th: भारतीय छात्रों में विदेश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का क्रेज बहुत होता है और तो 12वीं के बाद कई छात्रों का सपना भी होता है कि वे विदेश जाकर पढ़ाई करें. हर साल देश के लाखों छात्र यूएस, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जाकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं. लेकिन बहुत से छात्र ऐसे भी है जिनको सही जानकारी न होने की वजह से यह सपना अधूरा रह जाता है और विदेश पढ़ने की इच्छा पूरी नहीं हो पाती. हालांकि, अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि, आज के समय में कई ऐसे
देश हैं जहां भारतीय छात्रों के लिए एडमिशन और वीजा मिलना बहुत आसान हो गया है. सही प्लानिंग और जानकारी के साथ आप कम खर्च में भी विदेश में पढ़ाई कर सकते हैं.
एडमिशन के लिए जरूरी एग्जाम और विकल्प
अगर आप भारतीय हैं और आपको विदेश में पढ़ना है तो उसके लिए आपको कुछ टेस्ट को पास करना होता है. जैसे जीआरई (GRE), जीमैट(GMAT), एसएटी(SAT), एमसीएटी (MCAT) और एलएसएटी (LSAT) जैसे एग्जामस. इन टेस्ट्स को पास करने के बाद ही आपको विदेश में अच्छे यूनिवर्सिटीज में एडमिशन मिलता है. वहीं, कई देश ऐसे भी है जो यूनिवर्सिटीज में 12वीं के बाद साधे अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन देती है. जैसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और न्यूजीलैंड जैसे देश भारतीय छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. खास बात यह है कि जर्मनी जैसे देश में कई पब्लिक यूनिवर्सिटीज में bachelor ‘s और master’s की पढ़ाई यानी ट्यूशन फीस बहुत कम या न के बराबर होती है, जबकि कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम काम करने की सुविधा भी मिलती है.
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स्टूडेंट वीजा प्रोसेस और जरूरी डॉक्यूमेंट्स
वीजा प्रोसेस की बात करें तो हर देश के अपने नियम होते हैं भारत से बाहर पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा (Student Visa) प्राप्त करना एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से आपके द्वारा चुनी गई यूनिवर्सिटी और देश पर निर्भर करती है. साथ ही यह प्रक्रिया यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर लेटर मिलने के बाद ही शुरू होती है. लेकिन अगर आपके पास ऑफर लेटर, ट्यूशन फीस का भुगतान, सही डॉक्यूमेंट्स और फाइनेंशियल प्रूफ है तो वीजा मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती. आमतौर पर स्टूडेंट वीजा के लिए आपको IELTS, TOEFL, या PTE इंग्लिश टेस्ट का स्कोरकार्ड भी देना होता है. वीजा फीस देश के हिसाब से अलग-अलग होती है और प्रोसेस में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीने तक का समय लग सकता है.
विदेश में पढ़ाई का खर्च और बजट प्लानिंग
अब खर्च की बात करें तो यह देश और शहर के अनुसार बदलता है. कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सालाना खर्च लगभग 15 से 25 लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि जर्मनी में यह खर्च काफी कम हो जाता है. रहने, खाने और अन्य खर्चों के लिए आपको हर महीने अलग से बजट बनाना होता है. अगर आप सही देश और कोर्स चुनते हैं, तो विदेश में पढ़ाई करना न सिर्फ आसान बल्कि आपके करियर के लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है.
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