मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में Madhya Pradesh डिजिटल सुशासन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का मुख्य फोकस प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाना है, जिसके लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।आज के दौर में डिजिटल परिवर्तन केवल एक विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है, और इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में ई-गवर्नेंस को मजबूती दी जा रही है। विभिन्न सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो रही है।
अब लोग घर बैठे ही प्रमाण पत्र, लाइसेंस, पंजीकरण, शिकायत निवारण और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।सरकार द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल्स और मोबाइल आधारित सेवाओं ने योजनाओं के क्रियान्वयन को तेज़ और प्रभावी बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से लाभार्थियों को सीधे उनके बैंक खातों में राशि ट्रांसफर की जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का भरोसा भी शासन-प्रशासन पर मजबूत हुआ है।इसके साथ ही डेटा प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को भी डिजिटल रूप दिया गया है, जिससे सरकारी योजनाओं की प्रगति पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकती है। अधिकारियों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है और नीतियों का क्रियान्वयन अधिक सटीक और प्रभावी हो रहा है।डिजिटल सुशासन के इस मॉडल ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से सकारात्मक प्रभाव डाला है।
गांवों में भी डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ने से आम नागरिकों को अब शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे डिजिटल समावेशन को बढ़ावा मिला है और हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।कुल मिलाकर, Madhya Pradesh “डिजिटल सुशासन” के क्षेत्र में एक नई पहचान बना रहा है, जहां तकनीक के माध्यम से शासन को सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व में यह पहल प्रदेश को डिजिटल रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।