लोकसभा में बिल गिरा, अब संशोधित ढांचे के साथ 2029 चुनाव से लागू करने की योजना; सीटें बढ़ाकर 850+ करने का भी प्रस्ताव |
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका और पारित नहीं हो पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसे पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, जो पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, ताजा घटनाक्रमों के बाद सरकार अब इस विधेयक को नए और तेज़ ढांचे के साथ लागू करने की दिशा में काम कर रही है। अप्रैल 2026 में कैबिनेट स्तर पर एक ड्राफ्ट संशोधन को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले 33% महिला आरक्षण को लागू करना है।
नई योजना के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इस कानून को जनगणना में हुई देरी से अलग किया जा सकता है, जिससे प्रक्रिया तेज़ हो सके। इसके अलावा भविष्य में संसद की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रस्ताव है कि लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर लगभग 850 या उससे अधिक की जाएं, जिनमें करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए नए परिसीमन की योजना है, ताकि सीटों का पुनर्गठन ताजा आंकड़ों के आधार पर किया जा सके। साथ ही, आरक्षित सीटों को हर परिसीमन के बाद घुमाया जाएगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिल सके। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आरक्षण केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य विधानसभाओं और केंद्र शासित प्रदेशों—जैसे दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर—की विधानसभाओं में भी लागू किया जाएगा।
🔮 वर्तमान बनाम भविष्य: अभी जहां बिल संसद में पास नहीं हो पाया है, वहीं भविष्य की रणनीति इसे बड़े स्तर पर और स्थायी रूप से लागू करने की ओर इशारा करती है। 2026 में राजनीतिक सहमति की कमी दिखी, लेकिन 2029 तक इसे लागू करने के लिए संरचनात्मक और कानूनी बदलावों की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है।
👉 कुल मिलाकर, यह मुद्दा फिलहाल राजनीतिक गतिरोध में फंसा है, लेकिन आने वाले वर्षों में यह भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
News By Aazam Lala