जापान ने पकड़ी चीन की राह, जापानी मुस्लिमों की बड़ी मुश्किलें |
जापान के फुजिसावा शहर में शिंटो मंदिर के पास बन रही विशाल मस्जिद के निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दे में तब्दील हो गया है। जापान में तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी के बीच, इस विवाद ने जापानी समाज में एक नए तरह की बहस को जन्म दिया है।
मुस्लिम समुदाय की आवाजजापान में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि वे जापान से प्यार करते हैं और जापानी कानूनों का पालन करते हैं। उनका कहना है कि मस्जिद का निर्माण उनके धार्मिक अधिकारों का हिस्सा है और इसे रोकना उनके अधिकारों का हनन है।
जिस तरह भारत में मुस्लिम अल्पसंख्यक हो कर अपने धार्मिक स्वतंत्रता के साथ अपने धार्मिक रीति रिवाज और अपने धार्मिक स्थानों पर इबादत करने की आज़ादी के साथ भारत में रहते है तो क्या जापान के मुस्लिमों को जापान में अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के साथ क्यों नहीं रहने दिया जाना चाहिए जापान की सरकार को जापानी मुस्लिमों को उस देश का नागरिक सम्मान देने में क्या परेशानी है ?
दूसरी और जापानी नागरिकों का कहना है कि मस्जिद का निर्माण उनकी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। उनका कहना है कि जापान एक शांतिपूर्ण देश है और वे किसी भी तरह की सांस्कृतिक या धार्मिक विवाद को नहीं चाहते हैं और धीरे धीरे जापान में मुस्लिमों की बढ़ती आबादी से एक दिन जापान में मुस्लिम बहु संख्यक हो कर जापान को मुस्लिम देश बना देंगे।
जो कि ये विचार धारा बिलकुल ग़लत है बेबुनियाद है पूरी दुनिया में मुस्लिमों देशों के अलावा मुस्लिम जहां भी जिस भी देश में रहते है वहां के क़ानून का पालन और देश से प्रेम करने वाले बन कर देश के लिए जान देने और जान लेने पर भी पीछे नहीं हटते है देश के प्रति सम्मान और देश प्रेम उनके दिलों में बसा होता है।
इस विवाद में जापान सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सरकार को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और साथ ही जापानी नागरिकों की गलत धारणा को भी दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। सरकार को एक ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे जापानी नागरिकों के दिलों में जापानी मुस्लिमों के प्रति जो गलत धारणा और नफरत है उसे ख़त्म करने का प्रयास करने चाहिए और ऐसा समाधान निकले जो दोनों पक्षों को स्वीकार हो।
जापान में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखकर लगता है कि वे चीन के नक्शे कदम पर चल रहा है। चीन में मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाई जा रही है। जापान में भी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बढ़ते विरोध और मस्जिद निर्माण पर रोक से लगता है कि वे भी इसी रास्ते पर जा रहे हैं।
यह चिंताजनक है क्योंकि जापान हमेशा से एक शांतिपूर्ण और सहिष्णु देश रहा है। अगर वे चीन के नक्शे कदम पर चलते हैं तो यह उनकी संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ होगा। कुछ उदाहरण जैसे कि शिनजियांग में मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचार और हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई से पता चलता है कि चीन किस तरह से मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है।
जापान में मुस्लिमों पर अत्याचार और अधिकारों के हनन के कई उदाहरण हैं। कुछ प्रमुख उदाहरण हैं:
- कब्रिस्तान की जमीन नहीं देना: जापान सरकार ने मुसलमानों को कब्रिस्तान के लिए नई जमीन देने से इनकार कर दिया है, जो उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है।
- मस्जिद निर्माण पर विरोध: जापान के कई हिस्सों में मस्जिद निर्माण पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जो मुस्लिम समुदाय के लिए चिंताजनक है।
- इस्लाम विरोधी भावना: जापान में इस्लाम विरोधी भावना बढ़ रही है, जो मुस्लिम समुदाय के लिए खतरा है।
- नागरिकता नहीं देना: जापान मुसलमानों को नागरिकता नहीं देता है, जो उनके अधिकारों का हनन है।
- इस्लाम और कुरान पर प्रतिबंध: जापान में इस्लाम और कुरान पर प्रतिबंध लगाने की खबरें हैं, जो मुस्लिम समुदाय के लिए चिंताजनक है।
- इस विवाद से यह पता चलता है कि जापान में मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है। जापानी नागरिकों की चिंताओं को समझने की जरूरत है, लेकिन साथ ही मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा भी करनी चाहिए। जापान सरकार को इस मामले में एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और एक ऐसा समाधान निकालना चाहिए जो दोनों पक्षों को स्वीकार हो।
- जापान को इससे सीखना चाहिए और अपने देश में मुस्लिम समुदाय के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
न्यूज़ बाय
रज़ा लाला ख़ान