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Punjab News: BBMB नियुक्ति नियमों में बदलाव, AAP, कांग्रेस और अकाली दल ने केंद्र सरकार को घेरा

केंद्र सरकार द्वारा भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में दो अहम पदों पर नियुक्ति के नियमों में किए गए बदलाव के बाद पंजाब की सियासत में उबाल आ गया है. 13 अप्रैल को केंद्र सरकार की ओर से जारी नई अधिसूचना के बाद से ही पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे पंजाब के अधिकारों पर डाका करार दिया है.

दरअसल, पुरानी व्यवस्था के तहत BBMB में मेंबर (इरिगेशन) हमेशा हरियाणा से और मेंबर (पावर) पंजाब से नियुक्त किए जाते थे. लेकिन केंद्र सरकार की नई अधिसूचना के मुताबिक, अब इन दोनों महत्वपूर्ण पदों पर देश के किसी भी राज्य से अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है. हालांकि, अधिसूचना में यह जरूर लिखा गया है कि इन दो राज्यों (पंजाब और हरियाणा) के आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है कि नियुक्ति इन्हीं राज्यों से होगी.

कम 5 साल काम का अनुभव होना अनिवार्य

इसके लिए बाकायदा योग्यता भी तय की गई है. मेंबर (इरिगेशन) के लिए मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से सिविल/मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, 20 साल का रेगुलर अनुभव और कम से कम एक साल चीफ इंजीनियर का अनुभव मांगा गया है. वहीं, मेंबर (पावर) के लिए इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री, 20 साल का अनुभव और 66 किलोवाट के पावर प्लांट या ट्रांसमिशन लाइन में कम से कम 5 साल काम का अनुभव होना अनिवार्य किया गया है.

‘यह पंजाब विरोधी फैसला और संघीय ढांचे पर हमला’

पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने केंद्र सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से ‘पंजाब विरोधी फैसला’ और देश के ‘संघीय ढांचे पर हमला’ बताया है. उन्होंने पंजाब के भाजपा नेताओं से इस मुद्दे पर जवाब मांगते हुए केंद्र सरकार से तुरंत यह फैसला वापस लेने की मांग की है.

‘धीरे-धीरे छीने जा रहे पंजाब के अधिकार’

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी कड़ा एतराज जताया है. उन्होंने कहा, “धीरे-धीरे पंजाब के अधिकार छीने जा रहे हैं. पहले नंगल बांध की सुरक्षा के लिए पंजाब पुलिस को हटाकर वहां CISF को तैनात कर दिया गया. फिर चेयरमैन और अब मेंबर के पद भी बाहरी राज्यों के लोगों को दिए जा रहे हैं, जिससे पंजाब की हिस्सेदारी लगातार कमजोर हो रही है.” उन्होंने राज्य सरकार को नसीहत दी कि वह केंद्र से इस मसले पर बात करे और पंजाब के हकों की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़े.

अकाली दल ने AAP और केंद्र पर लगाए मिलीभगत के आरोप

शिरोमणि अकाली दल के कद्दावर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मुद्दे पर सीधा राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार पर ही निशाना साध दिया. मजीठिया ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार और केंद्र सरकार के बीच अंदरखाते कोई समझौता है, जिसके तहत लगातार BBMB में पंजाब के अधिकारों से समझौता किया जा रहा है और राज्य के हितों को कमजोर किया जा रहा है.

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