Skip to content

नर्मदा नदी में उड़ेला गया 11000 लीटर दूध! ऑक्सीजन लेवल पर बुरा असर होने की आशंका, बढ़ा आक्रोश

मध्य प्रदेश के सीहोर में एक धार्मिक अनुष्ठान के बाद नर्मदा नदी में करीब 11,000 लीटर दूध बहाया गया, जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो को देखने के बाद पर्यावरण प्रेमी और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है. उन्होंने इस कृत्य के इकोसिस्टम पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव की बात कही है.

जानकारी के मुताबिक, जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर भेरुंडा क्षेत्र के सतदेव गांव में पातालेश्वर महादेव मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान 21 दिवसीय एक धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया था. इसके समापन अवसर पर नर्मदा नदी में करीब 11,000 लीटर दूध सीहोर जिले में डाला गया था.

आयोजकों ने कहा कि पानी की शुद्धता, श्रद्धालुओं की भलाई और समृद्धि के लिए अनुष्ठान और प्रार्थना के हिस्से के रूप में नदी में दूध चढ़ाया गया था. दूध को टैंकरों में नदी के किनारे लाया गया और बाद में भक्तों की भीड़ की उपस्थिति में मंत्रों के जाप के बीच बहते पानी में डाला गया. पर्यावरणविदों ने इस प्रथा पर चिंता जताई और बुरे प्रभाव की चेतावनी दी.

नदी में पानी का ऑक्सीजन लेवल हो जाएगा कम! 

एमपी के जाने-माने पर्यावरणविद् और वन्य जीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने कहा, ‘इतनी बड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ पानी में घुलित ऑक्सीजन को कम कर सकते हैं, जिससे नदी पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘ये पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर स्थानीय समुदायों को प्रभावित करते हैं और जलीय जीवन के साथ-साथ घरेलू जानवरों को भी खतरे में डालते हैं.’ ऐसे कार्यक्रम सचेत होकर प्रतीकात्मक रूप से भी किए जा सकते हैं.

दूध से कार्बनिक प्रदूषण होगा

जाने-माने पर्यावरणविद सुभाष पांडे ने कहा कि 11,000 लीटर दूध एक महत्वपूर्ण कार्बनिक प्रदूषक के रूप में कार्य करता है. वहीं, सोशल मीडिया पर यह वायरल वीडियो देखने वाले अन्य लोगों ने भी नाराजगी जताई और कहा कि देश में कितने गरीब बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा. अगर 11 हजार लीटर दूध गरीबों में बांट दिया जाता तो कितने पुण्य का काम होता.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *