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BPSC से चयनित 69 राजस्व अधिकारियों की खत्म हो सकती है नौकरी, विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में प्रखंड स्तर पर कार्यरत राजस्व अधिकारी, अंचलाधिकारी, राजस्व कर्मचारी, कानूनगो सहित कई कर्मी बीते 11 फरवरी से अपनी 17 सूत्री मांगों को लेकर सामूहिक हड़ताल पर हैं. हालांकि इसमें 50 फीसदी अंचल कार्यालय के कर्मी हड़ताल पर हैं तो 50% काम भी कर रहे हैं. अब जो लोग हड़ताल पर हैं उसके खिलाफ विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है. 

इसमें उन राजस्व अधिकारियों को टारगेट किया गया है जो 69वीं बीपीएससी परीक्षा पास होकर राजस्व कर्मी के रूप में काम कर रहे हैं और वह हड़ताल पर हैं. विभाग में ऐसे 69 राजस्व अधिकारियों को चिन्हित किया है और सभी को स्पष्टीकरण लेटर भेज दिया गया है. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो इन लोगों की नौकरी भी जा सकती है.

सामूहिक अवकाश को किया जा चुका है अवैध घोषित

राज्य सरकार ने सामूहिक अवकाश और सरकारी कार्यक्रमों से अनधिकृत अनुपस्थिति को लेकर परीक्ष्यमान (प्रोबेशन) राजस्व अधिकारियों के खिलाफ  कार्रवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उप सचिव संजय कुमार सिंह द्वारा सभी को अलग–अलग पत्र भेजकर 69वीं बीपीएससी बैच के 69 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. विभाग द्वारा कहा गया है कि इन अधिकारियों द्वारा लिया गया सामूहिक अवकाश अवैध घोषित किया जा चुका है. यानी इस अवधि को सेवा में नहीं गिना जाएगा.

13 अप्रैल तक देना होगा स्पष्टीकरण

संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि 25 मार्च 2026 की शाम 5 बजे तक उन सभी ने अपने-अपने पदों पर योगदान नहीं दिया है. पत्र में कहा गया है कि यह आचरण न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है. ऐसे में संबंधित अधिकारियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए. सख्त चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगर 13 अप्रैल 2026 तक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि अधिकारियों को इस विषय में कुछ नहीं कहना है, और उनके विरुद्ध एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

बता दे कि बिहार के 24 जिलों में 69वीं बीपीएससी परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी में कार्यरत हुए 69 प्रोबेशनरी ऑफिसर हैं. यह वैसे अधिकारी होते हैं जो नौकरी ज्वाइन कर लिया है लेकिन उनकी अवधि 6 महीना से लेकर 2 साल तक होती है. सरकार उन अधिकारियों को पर निगरानी रखती है. अगर उनका आचरण या उनका काम संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो सरकार नोटिस देकर उनके खिलाफ बड़ा निर्णय ले सकती है. 

24 जिलों में तैनात प्रोबेशनरी राजस्व अधिकारियों से स्पष्टीकरण

अभी बिहार के 24 जिलों में तैनात परीक्ष्यमान (Probationary) अधिकारियों में सर्वाधिक गया, रोहतास और मधुबनी जिले के हैं. स्पष्टीकरण मांगने की यह कार्रवाई राज्य के 24 जिलों में तैनात प्रोबेशनरी राजस्व अधिकारियों पर की गई है. इनमें गया जिले में आठ, रोहतास जिले में सात और मधुबनी जिले के पांच राजस्व अधिकारी शामिल हैं. इसके अलावा बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मधेपुरा, पूर्वी चंपारण, वैशाली और जमुई जिलों में तैनात चार-चार, सिवान, सीतामढ़ी और नालंदा जिलों में तैनात तीन-तीन तथा औरंगाबाद जिले में तैनात दो अधिकारी शामिल हैं. पटना सहित किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, सुपौल, नवादा, अररिया, अरवल और लखीसराय जिलों में तैनात एक–एक अधिकारी भी इस कार्रवाई के दायरे में आए हैं.

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