न्यूज़ बाय : रज़ा लाला ख़ान
उत्तर प्रदेश के महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अप्रैल 2026 के अंत में उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने के दावे किए जा रहे हैं, जिनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
मेरठ से प्रयागराज को जोड़ने वाला लगभग 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे राज्य की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक माना जाता है। इस परियोजना पर करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत बताई गई है और इसे उत्तर प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया था।
हालांकि उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क की सतह पर दरारों की खबरें सामने आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग किए गए निर्माण सामग्री और जल निकासी (ड्रेनेज) व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो में सड़क के कुछ हिस्सों पर दरारें और सतह क्षति जैसी स्थितियां दिखाई दे रही हैं, हालांकि इन दावों की तकनीकी पुष्टि अभी शेष है।
विपक्षी दलों और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी लागत वाली परियोजना में यदि शुरुआती चरण में ही ऐसी समस्याएं सामने आती हैं तो इसकी वजहों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, एक्सप्रेसवे के निर्माण और संचालन से जुड़ी एजेंसियों की ओर से विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह जानना आवश्यक होगा कि दरारें सतही स्तर की हैं या संरचनात्मक (Structural) समस्या का संकेत देती हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सामान्य तकनीकी खामी है जिसे शीघ्र ठीक किया जा सकता है, या फिर यह निर्माण गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इस संबंध में आधिकारिक जांच और तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
