न्यूज़ बाय : रज़ा लाला ख़ान
चीन में अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा सोने का भंडार (Gold Reserve) मिला है, जो कुल मिलाकर लगभग 2,000 मीट्रिक टन होने का अनुमान है। चीनी मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खजाना इतना विशाल है कि इसे ले जाने के लिए 200 से अधिक भारी ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है।
खोज कहाँ और कैसे हुई यह खोज मुख्य रूप से मध्य चीन के हुनान प्रांत (Hunan Province) के पिंगजियांग काउंटी में स्थित वांगू गोल्ड फील्ड (Wangu Gold Field) में हुई है।
तकनीक का कमाल: चीनी वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों ने इस दबे हुए खजाने का पता लगाने के लिए आधुनिक 3D जियोलॉजिकल मॉडलिंग (3D Geological Modeling) तकनीक का इस्तेमाल किया। दो बड़े भंडार: पिछले कुछ महीनों की खोज में हुनान प्रांत और इसके अलावा लियाओनिंग प्रांत में सोने के दो बड़े ब्लॉक या बेल्ट का पता चला है, जिन्हें मिलाकर कुल क्षमता 2,000 टन से अधिक आंकी जा रही है।
40 से ज्यादा सोने की परतें: वैज्ञानिकों को जमीन के नीचे 2,000 मीटर (2 किलोमीटर) की गहराई तक 40 से अधिक सोने की नसें (Gold Veins) मिली हैं, जिनमें करीब 300 टन सोना प्रमाणित हो चुका है। 3 किलोमीटर गहरी खुदाई: 3D मॉडलिंग के अनुसार, जमीन के नीचे 3,000 मीटर (3 किलोमीटर) की गहराई तक जाने पर यह भंडार 1,000 से 1,400 टन से भी ज्यादा बैठता है।
उच्च गुणवत्ता: यहाँ से मिले चट्टानों के सैंपल (Core Samples) बेहद उच्च गुणवत्ता के हैं। आमतौर पर भूमिगत खदानों में प्रति टन अयस्क (Ore) में 8 ग्राम सोना मिलता है, लेकिन यहाँ प्रति टन अयस्क में 138 ग्राम तक शुद्ध सोना देखा गया है, जिसे ‘विजिबल गोल्ड’ (आंखों से दिखने वाला सोना) कहा जा रहा है।चीनी सरकारी एजेंसी शिन्हुआ (Xinhua) और इंटरनेशनल रिपोर्ट्स के अनुसार, हुनान प्रांत में मिले केवल एक हिस्से (1,000 टन) की अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग 83 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपये) है। ऐसे में पूरे 2,000 टन भंडार की कुल वैल्यू इससे दोगुनी यानी बेहद हैरान करने वाली है।
चीन वर्तमान समय में वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनावों के बीच चीन अपने केंद्रीय बैंक के रिजर्व को डॉलर से हटाकर सोने में बदल रहा है। यह खोज उसकी अर्थव्यवस्था को एक अभेद्य सुरक्षा कवच देगी |
हालांकि चीनी भूवैज्ञानिकों के ये दावे बेहद बड़े हैं, लेकिन वैश्विक सोने के विशेषज्ञों (जैसे वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल) का कहना है कि इस पूरे सोने को जमीन से बाहर निकालने और ‘प्रमाणित भंडार’ (Certified Reserves) में बदलने के लिए अभी कई सालों की कड़ी माइनिंग और भारी निवेश की जरूरत होगी।
