
मध्यप्रदेश में सहकारिता नियमों और गेहूं खरीदी की देरी के चलते किसान भारी ब्याज के बोझ तले दब रहे हैं। भोपाल के बैरसिया के ललोई गांव के किसान ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि उन्होंने KCC से 2 लाख का लोन लिया था और तय समय पर 2 लाख 300 रुपए जमा भी कर दिए, लेकिन 5 हजार रुपए के वाउचर की तकनीकी कमी के चलते उन पर सिर्फ 15 दिनों में 12,194 रुपए ब्याज लगा दिया गया।
किसान का कहना है कि खाते में पैसा जमा होने के बावजूद सोसाइटी ने ब्याज वसूला, जो पूरी तरह अन्याय है। वहीं, गेहूं खरीदी 9 अप्रैल से शुरू हुई जबकि ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 31 मार्च तय कर दी गई, जिससे किसान संकट में आ गए।
किसानों का आरोप है कि फसल बिके बिना लोन चुकाना संभव नहीं, फिर भी नियमों के कारण उन्हें डिफॉल्टर बना दिया गया। प्रदेश में करीब 50% किसान इसी वजह से डिफॉल्टर हो चुके हैं, जिससे सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
