न्यूज़ बाय: रज़ा लाला ख़ान
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना किसी भी पर्वतारोही के लिए जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। लेकिन नेपाल की प्रसिद्ध पर्वतारोही Lhakpa Sherpa ने इस उपलब्धि को एक बार फिर अपने नाम कर इतिहास रच दिया है। 17 मई 2026 को उन्होंने 11वीं बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर किसी भी महिला द्वारा सबसे अधिक बार एवरेस्ट फतह करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड और मजबूत कर दिया।
“माउंटेन क्वीन” के नाम से मशहूर ल्हाकपा शेर्पा की यह उपलब्धि केवल एक पर्वतारोहण रिकॉर्ड नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और अदम्य साहस की प्रेरणादायक कहानी भी है। उनकी सफलता दुनिया भर की महिलाओं और युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं।
नेपाल के दूरस्थ और दुर्गम मकालू क्षेत्र में जन्मी ल्हाकपा का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। आर्थिक चुनौतियों के कारण उन्हें औपचारिक शिक्षा का अवसर नहीं मिल पाया। हालांकि, पहाड़ों के प्रति उनका जुनून बचपन से ही उन्हें आकर्षित करता था। यही जुनून उन्हें पर्वतारोहण की दुनिया में ले आया, जहां उन्होंने शुरुआत कुली और सहायक के रूप में की।
धीरे-धीरे उन्होंने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के दम पर पर्वतारोहण में पहचान बनानी शुरू की। वर्ष 2000 में वे एवरेस्ट पर चढ़ाई कर सुरक्षित लौटने वाली पहली नेपाली महिला बनीं। यह उपलब्धि उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई और यहीं से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
जीवन की राह उनके लिए कभी आसान नहीं रही। अमेरिका में बसने के बाद भी उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए सुपरमार्केट में सफाई और अन्य छोटे-मोटे काम किए। आर्थिक संघर्षों और निजी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने पर्वतारोहण के सपने को कभी नहीं छोड़ा। यही जज्बा उन्हें बार-बार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी तक ले गया।
ल्हाकपा की प्रेरणादायक यात्रा को विश्व स्तर पर तब और पहचान मिली जब उनकी कहानी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री Mountain Queen: The Summits of Lhakpa Sherpa रिलीज हुई। इस फिल्म में उनके संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों और पर्वतारोहण के प्रति उनके समर्पण को दिखाया गया है, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि एवरेस्ट पर 11वीं बार पहुंचना केवल शारीरिक क्षमता का प्रमाण नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और असाधारण साहस का भी उदाहरण है। अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन, खतरनाक बर्फीले रास्ते और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बार-बार एवरेस्ट फतह करना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।
ल्हाकपा शेर्पा की कहानी यह साबित करती है कि यदि व्यक्ति के पास दृढ़ इच्छाशक्ति और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण हो, तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटियां भी उसके हौसलों के आगे छोटी पड़ जाती हैं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और पर्वतारोहण के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगी।
