प्रयागराज माघ मेला विवाद से सुर्खियों में आए ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक और बड़ा ऐलान किया है. प्रयागराज माघ मेला और उत्तर प्रदेश सरकार को सीधी चुनौती देने के बाद अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी से चतुरंगिणी सेना के गठन का ऐलान कर दिया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा गठित यह चतुरंगिणी सेना गौ रक्षा के लिए कार्य करेगी, जिसमें 2.18 लाख सैनिकों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया है. जानकारी के मुताबिक, इस सेना की चार यूनिट होगी जो धन बल, जन बल, मन बल और तन बल पर आधारित होंगी.
सदस्यों के हाथ में दिखा परशु नामक अस्त्र
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने काशी में गौ रक्षा के लिए चतुरंगिणी सेना के गठन का ऐलान कर दिया. इस दौरान उनके साथ प्रथम 27 सदस्य भी मौजूद थे जिनके हाथ में परशु नामक शास्त्र और पीला रंग का वस्त्र पहने हुए नजर आए. इस दौरान वहां मौजूद सदस्यों के द्वारा शंखनाद भी किया गया.
सेना में 2.18 लाख सैनिकों के भर्ती का लक्ष्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि, गौ रक्षा के लिए सबसे पहले गौ हत्यारे को रोका जाएगा, उन्हें टोका जाएगा और उसके बाद उन्हें समझाया जाएगा. इस दौरान इस सेना में 2.18 लाख सैनिकों के भर्ती का लक्ष्य रखा गया है, इस सेना के प्रमुख यानी सेनापति शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ही होंगे. शंकराचार्य का कहना है कि इसमें सिर्फ एक जाति के नही बल्कि सभी वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं .
‘सनातन धर्म के हिंदुओं को डरा दिया गया है’
शंकराचार्य का कहना है कि हमारे सनातन धर्म के हिंदुओं को डरा दिया गया है, वह अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाना चाहते हैं लेकिन उठा नहीं पाते हैं , सच बोलने को लेकर उनके ऊपर आक्रमण हो रहा है उनमें भय व्याप्त है. सनातनियों के हृदय में जो भय व्याप्त है उसको समाप्त करना, सनातन धर्म के प्रतीकों की रक्षा करना और गौ माता की रक्षा के उद्देश्य से चतुरंगिणी सेना का गठन किया गया है. सबसे प्रमुख बात की इसमें महिलाएं भी शामिल होती नजर आ रही हैं.