उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली संकट तेजी से गहरा रहा है. एक मार्च को प्रदेश में बिजली की मांग 3.8 करोड़ यूनिट थी लेकिन बृहस्पतिवार तक यह बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई. इसके मुकाबले उपलब्धता महज 2.3 करोड़ यूनिट है जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है. उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी UPCL को कई इलाकों में कटौती करनी पड़ रही है.
राज्य उत्पादन 90 लाख, केंद्रीय पूल से 1.3 करोड़, फिर भी कमी
प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं से लगभग 90 लाख यूनिट बिजली मिल पा रही है जबकि केंद्रीय पूल से करीब 1.3 करोड़ यूनिट उपलब्ध हो रही है. कुल मिलाकर 2.3 करोड़ यूनिट ही मिल पा रही है. अंतर को पूरा करने के लिए UPCL खुले बाजार से करीब 70 लाख यूनिट बिजली खरीद रहा है. लेकिन इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में बिजली के दाम भी 10 रुपये प्रति यूनिट के करीब पहुंच गए हैं और पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही.
इजरायल-ईरान युद्ध से काशीपुर का 214 MW गैस प्लांट बंद
बिजली संकट की एक बड़ी वजह गैस आधारित पावर प्लांटों का बंद होना है. इजरायल-ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा है. काशीपुर स्थित 214 मेगावाट क्षमता का श्रावंती और गामा कंपनी का गैस आधारित पावर प्लांट फिलहाल बंद पड़ा है. यदि बाजार से गैस खरीदकर इन्हें चलाया जाए तो बिजली उत्पादन लागत 10 रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक हो जाएगी.
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में ढाई घंटे, उद्योगों में भी दो घंटे कटौती
स्थिति का असर सबसे ज्यादा हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा रहा है जहां रोजाना करीब दो से ढाई घंटे तक बिजली कटौती हो रही है. छोटे कस्बों में एक से डेढ़ घंटे की कटौती हो रही है. स्टील फर्नेस से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों में भी करीब दो घंटे तक बिजली रोकी जा रही है जिससे उद्योगों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने लगी है.
500 MW के PPA में भी अड़चन, नियामक आयोग ने लगाई रोक
UPCL ने पहले 500 मेगावाट बिजली खरीद के लिए PPA किया था लेकिन तकनीकी कारणों से 350 मेगावाट की आपूर्ति नहीं हो पाई. शेष 150 मेगावाट खरीद पर भी नियामक आयोग ने रोक लगा दी है. इस PPA को लागू करने के लिए आयोग से दोबारा अनुमति लेनी होगी. UPCL के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार का कहना है कि मांग के मुकाबले बिजली उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन मांग इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.