राजस्थान के बीकानेर में रहने वाली नमिता सोनी ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में 547वीं रैंक हासिल करके अपने परिवार, समाज और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है. यह सफलता खास तौर पर इसलिए अहम है, क्योंकि नमिता ने समाज में लड़कियों को लेकर चलने वाली पुरानी सोच को चुनौती दी है. आइए जानते हैं उनके स्ट्रगल के बारे में सबकुछ.
ऐसा रहा नमिता का सफर
नमिता सोनी राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली हैं. वह आईआईटी मुंबई से पास आउट हैं. यह यूपीएससी में उनका तीसरा प्रयास था. लगातार मेहनत, धैर्य और सही रणनीति से उन्हें यह सफलता मिली. नमिता ने बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली थी. फोन पर वह सिर्फ पढ़ाई से जुड़ी चीजें देखती थीं, बाकी समय बिल्कुल नहीं बिताती थीं. उनका पूरा फोकस किताबों, नोट्स और टेस्ट सीरीज पर रहा. इससे उनका ध्यान भटका नहीं और वह अच्छी तरह पढ़ाई कर पाईं.
परिवार का ‘बड़ा बेटा’ बनीं नमिता
मां मंजू सोनी ने बताया कि उनके घर में तीन बेटियां हैं और कोई बेटा नहीं है. समाज में कई बार यह बात सुनने को मिलती थी कि बेटा नहीं होने से परिवार अधूरा है, लेकिन नमिता की इस कामयाबी ने उनके सिर को गर्व से ऊंचा कर दिया है. मंजू के मुताबिक, नमिता ने साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होतीं. वे बेटों से भी बड़ा काम करके दिखा सकती हैं.
डिप्रेशन से कैसे निपटीं नमिता?
नमिता बताती हैं कि तैयारी के समय कभी-कभी मन उदास हो जाता था. ऐसे में वह डिप्रेशन से दूर रहने के लिए मोटिवेशनल गाने सुनती थीं. पॉजिटिव सोच रखती थीं और खुद को मोटिवेट करती रहती थीं. वह परिवार और दोस्तों के साथ बात करके भी मन हल्का करती थीं. अपनी सफलता का पूरा श्रेय वह अपने परिवार को देती हैं. खास तौर पर उनकी दादी ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया. दादी कहती रहती थीं कि बेटी कुछ बड़ा करेगी.
सुनार की बेटी का बड़ा कमाल
नमिता के पिता ज्वैलरी का व्यवसाय करते हैं. उन्होंने हमेशा बेटियों को पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए सपोर्ट किया. उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनकी बेटियां कोई बड़ा काम करेंगी. आज नमिता ने उनका सपना पूरा कर दिया है. वह बेहद खुश हैं और बेटी पर गर्व महसूस कर रहे हैं.
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