सरायकेला के खापरसाई प्राथमिक विद्यालय में मंगलवार (17 मार्च) को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. जर्जर स्कूल भवन का बाहरी छज्जा अचानक भरभराकर गिर पड़ा. उस समय स्कूल में कुल 28 बच्चे मौजूद थे. गनीमत यह रही कि मध्यान्न भोजन की घंटी बजते ही बच्चे क्लासरूम से बाहर निकल चुके थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था.
घटना के दौरान तीन बच्चियां 11 वर्षीय मुस्कान बारला, 9 वर्षीय रेशमी बारला और 7 वर्षीय सोनाली जामुदा घायल हो गईं. सभी को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में घर भेज दिया गया. हालांकि इस घटना के बाद बच्चों में डर का माहौल है. कई बच्चे अब क्लासरूम के अंदर जाने से घबरा रहे हैं.
पेड़ के नीचे लग रही क्लास, खुले में पढ़ाई
हादसे के बाद स्कूल का माहौल पूरी तरह बदल गया है. मिड-डे मील के बाद बच्चों को स्कूल के बाहर पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाया जा रहा है. शिक्षिका भी दरी बिछाकर खुले में पढ़ाती नजर आईं. अभिभावकों का कहना है कि जब तक भवन सुरक्षित नहीं होता, तब तक बच्चों को अंदर भेजना जोखिम भरा है.
38-40 साल पुराना है भवन, हालत बेहद खराब
ग्रामीणों के मुताबिक यह स्कूल भवन करीब 38 से 40 साल पुराना है. साल 1985 में बने इस दो कमरे के भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. बरसात में छत टपकती है, दीवारों से प्लास्टर गिरता रहता है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद बच्चे इसी खतरनाक भवन में पढ़ने को मजबूर हैं.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रेणु कुमारी पंडा ने 6 सितंबर 2025 को ही विभाग को पत्र लिखकर भवन की खराब स्थिति की जानकारी दी थी.
उन्होंने साफ चेतावनी दी थी कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और स्कूल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग भी की थी. लेकिन विभाग ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया.
24 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे अधिकारी, ग्रामीणों में गुस्सा
हादसे के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. बताया जा रहा है कि सूचना देने के बावजूद प्रभारी बीपीओ सांत्वना जेना देर से पहुंचीं, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है. हैरानी की बात यह भी है कि जिला स्तर के अधिकारी उपायुक्त और जिला शिक्षा अधीक्षक को भी इस घटना की जानकारी तक नहीं थी.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बच्चों की जान इतनी सस्ती है कि चेतावनी के बावजूद भी प्रशासन नहीं जागता? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद टूटेगी? फिलहाल खापरसाई स्कूल के बच्चे आज भी जर्जर भवन के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं और अभिभावकों में डर के साथ-साथ प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा भी है.