Skip to content

Rajasthan News: राजस्थान में खाने की क्वालिटी पर उठा सवाल, ‘ईट राइट ड्राइव’ अभियान में 11% फूड प्रोडक्ट फेल

राजस्थान के फूड सेफ्टी एंड ड्रग कंट्रोलर कमिश्नरेट ने पूरे प्रदेश में ‘ईट राइट ड्राइव’ अभियान चलाया. इस अभियान का उद्देश्य यह जांचना था कि बच्चों को मिलने वाला खाना सुरक्षित है या नहीं और क्या खाद्य पदार्थ तय मानकों के अनुसार बेचे जा रहे हैं. अभियान के तहत 1 से 31 दिसंबर 2025 के बीच अलग-अलग टीमों ने प्रदेश भर से कुल 670 फूड सैंपल लिए. इनमें बिस्किट, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, चिप्स, चॉकलेट, नूडल्स, कॉटन कैंडी, मिठाइयों के साथ-साथ समोसे-कचौरी जैसे स्ट्रीट फूड भी शामिल थे. इन सैंपलों की जांच अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, भरतपुर, बीकानेर, जयपुर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर की लैब्स में कराई गई.

670 में से 11.19% फूड प्रोडक्ट तय मानकों पर नहीं उतरे खरे

जांच में सामने आया कि 670 में से 75 सैंपल यानी 11.19% फूड प्रोडक्ट तय मानकों पर खरे नहीं उतरे. रिपोर्ट के अनुसार 4.03% सैंपल ऐसे पाए गए जिनमें गुणवत्ता की कमी थी, यानी उनमें पोषक तत्व या शुद्धता निर्धारित स्तर से कम थी. वहीं 2.68% सैंपल मिसब्रांडेड पाए गए, जिनके लेबल पर गलत या अधूरी जानकारी दी गई थी. इसके अलावा 2.54% सैंपल सीधे तौर पर सेहत के लिए असुरक्षित पाए गए.

श्रेणीवार आंकड़ों में सबसे ज्यादा खराबी, तैयार भोजन यानी स्ट्रीट फूड और रेडी-टू-ईट आइटम्स में सामने आई, जहां 41.3% सैंपल फेल पाए गए. इसके बाद पेय पदार्थों की श्रेणी में 30.7% सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे. वहीं बेकरी प्रोडक्ट्स जैसे केक, पेस्ट्री और बिस्किट के 24% सैंपलों में कमियां मिलीं.

खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों का किया जा रहा अत्यधिक इस्तेमाल

फूड सेफ्टी कमिश्नर डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि कई खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों का अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है. विशेष रूप से गहरे पीले और नारंगी रंग का उपयोग तय सीमा से ज्यादा पाया गया, जो बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकता है. कुछ सैंपलों में फैट की मात्रा कम थी, जबकि कुछ में दूध की शुद्धता मानकों से कम पाई गई. कई पैकेटों पर यह भी स्पष्ट नहीं था कि भोजन को सुरक्षित रखने के लिए किस माध्यम का उपयोग किया गया है.

हालांकि राहत की बात यह रही कि छोटे बच्चों के लिए बनाए जाने वाले उत्पाद जैसे शिशु आहार और न्यूट्रास्यूटिकल्स के सैंपल सुरक्षित पाए गए और उनमें कोई कमी नहीं मिली. जिलों के हिसाब से देखें तो भरतपुर में सबसे ज्यादा 29.41% सैंपल फेल पाए गए. उदयपुर, जोधपुर और जालोर में भी औसत से ज्यादा सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि कोटा के सैंपल सबसे सुरक्षित पाए गए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *