राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हालिया दिल्ली यात्रा और केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात पर राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं. जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को दिल्ली में शिष्टाचार भेंट के बजाय राजस्थान के हक और अधिकारों का हिसाब मांगना चाहिए था.
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश की आर्थिक सेहत विज्ञापन के ‘उत्कर्ष’ से कोसों दूर है और हकीकत में राज्य वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है. नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से राजस्थान के हिस्से में हुई भारी कटौतियों पर जवाब मांगा है.
केंद्र से मिलने वाली राशि में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी कटौती
जूली ने वित्तीय आंकड़ों को स्पष्ट करते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्थान के वित्तीय अधिकारों पर लगातार प्रहार किया जा रहा है. एसएएससीआई (SASCI) स्कीम के तहत जहां 15,000 करोड़ रुपये का अनुमान था. वहां मात्र 9,500 करोड़ रुपये मिले, जो कि 37% की सीधी कटौती है. इसी प्रकार, केंद्रीय करों (Devolution) के तहत 85,716 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले केवल 83,940 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए. Grant-in-Aid में भी 39,193 करोड़ रुपये की अपेक्षा के विरुद्ध मात्र 37,910 करोड़ रुपये ही मिले.
उन्होंने सवाल किया कि प्रदेश के हिस्से के ये 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये कहां गायब हो गए और मुख्यमंत्री इस पर मौन क्यों हैं. 15वें वित्त आयोग के तहत राजस्थान की हिस्सेदारी में लगातार गिरावट आ रही है और बजट 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार केंद्रीय करों से प्राप्त राशि में लगभग 1,776 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है.
कर्ज के जाल में फंसता राजस्थान- नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के सुशासन के दावों की पोल खोलते हुए कहा कि ‘2 साल बनाम 5 साल’ का राग अलापने वाली बीजेपी सरकार ने कर्ज लेने के मामले में सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि जहां कांग्रेस सरकार ने अपने पूरे 5 साल के कार्यकाल में 2.26 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. वहीं वर्तमान बीजेपी सरकार महज 3 साल में ही 2.22 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है. 5 साल का कर्ज 3 साल में ही डकारने वाली सरकार किस नैतिकता से वित्तीय प्रबंधन की बात करती है. हकीकत यह है कि राज्य की अर्थव्यवस्था (GSDP) का आकार 1.13 लाख करोड़ रुपये (करीब 6%) तक सिकुड़ गया है, जो प्रदेश के भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत है.
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आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही- जूली
टीकाराम जूली ने कहा कि एक तरफ सरकार आंकड़ों की बाजीगरी में उलझी है, वहीं दूसरी ओर आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है. प्रदेश में रसोई गैस की भारी किल्लत है, जिसका प्रमाण स्वयं मुख्यमंत्री की बेणेश्वर धाम की सभा में देखने को मिला. जहां भोजन गैस के बजाय लकड़ी के चूल्हों पर बनाया गया. जब मुख्यमंत्री की सभाओं में एलपीजी उपलब्ध नहीं है, तो आम आदमी और छोटे व्यापारियों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया कि क्या वे दिल्ली से इन घाटों की भरपाई का कोई ठोस वादा लाए हैं या राजस्थान को सिर्फ कर्ज के दलदल में फंसाकर लौट आए हैं.
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