Raghav Chadha Education: राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के अंदर बड़े फैसले के बाद राघव चड्ढा एक बार फिर चर्चा में है. पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के कोटा से बोलने का समय भी न दिया जाए.
राघव चड्ढा पर हुए इस एक्शन के बाद लोग उनके बारे में ज्यादा-ज्यादा से चीजें सर्च कर रहे हैं. लोग उनकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ उनकी पढ़ाई-लिखाई के बारे में भी जानना चाह रहे हैं. चलिए अब आपको बताते हैं कि राघव चड्ढा ने कहां से पढ़ाई की और उनके पास कौन सी डिग्री है.
दिल्ली से शुरू हुई पढ़ाई, कॉमर्स में ग्रेजुएशन
राघव चड्ढा का जन्म 11 नवंबर 1988 को दिल्ली में हुआ. उनकी शुरुआती पढ़ाई मॉडर्न स्कूल से हुई. स्कूलिंग पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम ऑनर्स की डिग्री हासिल की. कॉमर्स बैकग्राउंड से होने की वजह से उनकी रुचि वित्त और आर्थिक मामलों में शुरू से रही.
महज 22 साल में बने चार्टर्ड अकाउंटेंट
राघव चड्ढा की सबसे बड़ी शैक्षणिक उपलब्धियां यह माना जाती है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंसी पूरी कर ली. वह इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से प्रमाणित चार्टर्ड अकाउंटेंट है और महज 22 साल की उम्र में यह डिग्री हासिल कर ली थी. इसी कारण उन्हें वित्तीय मामलों की गहरी समझ रखने वाला नेता भी माना जाता है.
लंदन और हार्वर्ड से भी जुड़ी पढ़ाई
हाई एजुकेशन के लिए राघव चड्ढा ने विदेश का रुख किया. उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम किया. इसके अलावा उन्हें हार्वर्ड रिटर्न भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से भी शिक्षा से जुड़ा कार्यक्रम किया. इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पढ़ाई में उनकी प्रोफाइल को और मजबूत बनाया.
पढ़ाई के साथ प्रोफेशनल एक्सपीरियंस भी
चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के बाद राघव चड्ढा ने अकाउंटेंसी और फाइनेंस के क्षेत्र में काम किया और कई वैश्विक फर्मो से भी एक्सपीरियंस हासिल किया. यह अनुभव बाद में उनकी राजनीतिक छवि में भी नजर आया. जहां वे आर्थिक और नीतिगत मुद्दों पर मुखर रहते हैं. अप्रैल 2022 में राज्यसभा सांसद रहे राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी के युवा और शिक्षित नेताओं में गिने जाते हैं. संसद में वह अक्सर आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाते हैं, जिससे उनकी अलग पहचान बनी है.
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