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PM मोदी की मॉर्फ्ड वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत, दिल्ली की अदालत ने की यह टिप्पणी

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथित एआई-जनरेटेड मॉर्फ्ड वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाने के मामले में आरोपी विनोद तिवारी को नियमित जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि मामले में ज्यादातर सबूत डिजिटल हैं और जांच एजेंसी के पास पहले से मौजूद हैं. इसलिए आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है. आरोपी विनोद तिवारी ने BNSS की धारा 483 के तहत दूसरी बार नियमित जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, लोधी कॉलोनी में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फेसबुक पर विनोद तिवारी नाम के एक अकाउंट से प्रधानमंत्री का एआई से बनाया गया मॉर्फ्ड वीडियो पोस्ट और शेयर किया गया. इस वीडियो में प्रधानमंत्री को कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका बताई गई थी. 

जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ही यह फेसबुक अकाउंट चला रहा था और उसी ने वीडियो अपलोड कर सोशल मीडिया पर फैलाया. पुलिस ने उस मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है जिससे कथित तौर पर वीडियो शेयर किया गया था. पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूतों की जांच और इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल अभी जारी है.

दिल्ली पुलिस ने आरोपी की जमानत का किया विरोध

दिल्ली पुलिस ने आरोपी की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की हरकत का सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सौहार्द पर गंभीर असर पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने दलील दी कि जांच अभी अहम चरण में है. आरोपी की ओर से पेश वकील कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है. 

उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के समय BNSS की धारा 35(3) के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया जिससे गिरफ्तारी ही अवैध हो जाती है. बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि जिन धाराओं में मामला दर्ज है. उनमें अधिकतम सजा तीन साल तक है और अधिकांश धाराएं जमानती हैं. वकील ने दलील देते हुए कहा कि पूरा मामला डिजिटल सबूतों पर आधारित है. जो पहले ही पुलिस के कब्जे में हैं, इसलिए आरोपी को हिरासत में रखकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है.

बचाव पक्ष ने अदालत में जांच में सहयोग का दिया पूरा भरोसा 

पटियाला हाउस कोर्ट में वकील ने दलील देते हुए कहा कि विनोद तिवारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनका स्थायी पता है और वे कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं. साथ ही उनकी बुजुर्ग मां की देखभाल के लिए उनका घर पर होना जरूरी है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोप सोशल मीडिया पर एक मॉर्फ्ड वीडियो फैलाने से जुड़े हैं और इस मामले के अधिकतर सबूत इलेक्ट्रॉनिक हैं, जो पहले ही जांच एजेंसी ने जब्त कर लिए हैं. 

कोर्ट ने यह भी माना कि जांच जारी है, लेकिन फिलहाल आरोपी से आगे हिरासत में पूछताछ जरूरी नहीं लगती. अदालत ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी 14 मार्च से न्यायिक हिरासत में था और जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा तीन साल है.

पटियाला हाउस कोर्ट ने कहा आरोपी ट्रिपल टेस्ट में पास

जमानत पर फैसला देते हुए कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट का भी जिक्र किया. इसमें यह देखा जाता है कि आरोपी के भागने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कितनी संभावना है. कोर्ट ने पाया कि इन तीनों ही पहलुओं में आरोपी के खिलाफ कोई मजबूत आशंका नहीं दिखाई देती. 

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत को भी दोहराया कि जेल अपवाद है और जमानत नियम. कोर्ट ने कहा कि अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और मुकदमे में समय लग सकता है. इसलिए आरोपी को अनावश्यक रूप से जेल में रखना उचित नहीं होगा.

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