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NCERT की कक्षा 8 की किताब के एक अंश पर विवाद, ब्राह्मण समुदाय ने जताई आपत्ति

NCERT की कक्षा 8 की इतिहास की किताब ‘हमारे अतीत–III’ के एक अंश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस अंश में दिए गए एक चित्र और उसके विवरण को लेकर खासकर ब्राह्मण समुदाय के लोगों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस चित्र की व्याख्या से ब्राह्मण समुदाय को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है.

क्या है किताब में दिया गया चित्र और उसका संदर्भ

किताब के इस अध्याय में एक चित्र दिखाया गया है कि एक ब्राह्मण व्यक्ति ब्रिटेन की प्रतीक ‘ब्रिटेनिया’ को शास्त्र यानी पवित्र ग्रंथ भेंट करता हुआ दिखाई देता है. यह चित्र वर्ष 1782 में जेम्स रेनल द्वारा बनाए गए हिंदुस्तान के पहले नक्शे के आवरण का हिस्सा बताया गया है. इतिहास के अनुसार, उस समय रॉबर्ट क्लाइव ने जेम्स रेनल को भारत के नक्शे तैयार करने का काम सौंपा था. अंग्रेजों का मानना था कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की सही जानकारी पाने और अपने शासन को मजबूत करने के लिए नक्शे बनाना बेहद जरूरी है. नक्शों की मदद से अंग्रेज भारत के भूगोल, शहरों और क्षेत्रों को बेहतर तरीके से समझ सकते थे, जिससे प्रशासन और नियंत्रण आसान हो सके.

चित्र के जरिए क्या संदेश दिखाने की कोशिश

किताब में दिए गए विवरण के अनुसार, इस चित्र में यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि भारत के लोग अपनी इच्छा से अपने पवित्र ग्रंथ ब्रिटेनिया को सौंप रहे हैं. इसका संकेत यह दिया गया है कि जैसे ब्रिटिश सत्ता भारत की संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करने के लिए आई हो. हालांकि, इतिहासकारों का मानना है कि इस तरह के चित्र उस समय के औपनिवेशिक यानी ब्रिटिश दृष्टिकोण को दिखाते हैं. ब्रिटिश शासन अक्सर खुद को भारत का रक्षक और मार्गदर्शक दिखाने की कोशिश करता था, जबकि वास्तविकता में यह उनके शासन को सही ठहराने का एक तरीका भी था.

NCERT ने दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने इस मामले में सफाई जारी की है. NCERT का कहना है कि जिस अंश को लेकर विवाद हो रहा है, वह उनकी पुरानी इतिहास की किताब ‘हमारे अतीत–III’ से लिया गया था. यह पुस्तक राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2005 के आधार पर तैयार की गई थी. NCERT के अनुसार, यह पुरानी किताब अब वर्तमान पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है. संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह उस अंश के विचारों या मंतव्य से सहमत नहीं है.

नई शिक्षा नीति के बाद बदला गया पाठ्यक्रम

NCERT का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार, सामाजिक विज्ञान की नई किताबें तैयार की गई हैं. नई किताबों में संबंधित सामग्री को दोबारा लिखा गया है और विवादित हिस्से को वर्तमान पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है. इसलिए जिस सामग्री पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है, वह अब पढ़ाई का हिस्सा नहीं है. NCERT ने यह भी कहा कि उसकी पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य समाज में समझ, संतुलन और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है.

2025-26 लिखी किताब को लेकर भी उठे सवाल

हालांकि, NCERT के इस दावे के बीच कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया है कि जिस किताब की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है, उस पर 2025-2026 सत्र का उल्लेख दिखाई दे रहा है. इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर NCERT जल्द ही एक और आधिकारिक बयान जारी कर सकता है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके.

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