यूपी सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पंडित शब्द को विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ चुका है. महोबा के बीजेपी विधायक राकेश गोस्वामी ने इसे सरकार की छवि धूमिल करने वाली साजिश बताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी को समाज में वैमनस्यता फैलाने वाली पार्टी करार देते हुए सरकार पर बड़ा हमला बोला है.
उत्तर प्रदेश सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में पूछा गया एक प्रश्न अब बड़े विवाद की वजह बन गया है. प्रश्न में अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द पूछा गया था, जिसके विकल्पों में पंडित शब्द का उपयोग किया गया. इस मामले ने महोबा में सियासत गरमा दी है.
बीजेपी विधायक ने सीएम योगी को लिखा पत्र
जानकारी के अनुसार, बीजेपी के सदर विधायक राकेश गोस्वामी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है. विधायक का कहना है कि पंडित शब्द का अर्थ विद्वान, ज्ञानी और सम्मान से जुड़ा होता है. इसे नकारात्मक अर्थ वाले अवसरवादी शब्द के विकल्प के रूप में रखना न केवल अनुचित है, बल्कि एक वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करने वाली गहरी साजिश है. उन्होंने इसे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल और जातीय तनाव पैदा करने की कोशिश बताते हुए दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उन्होंने साफ किया कि बीजेपी ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलती है और यह कृत्य पार्टी को बदनाम करने के लिए किया गया है. जिसने भी ये किया उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी.
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समाज में जगह घोलने का काम कर रही बीजेपी- कांग्रेस
वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस के प्रदेश सचिव ब्रजराज सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी जब से सत्ता में आई है, लगातार समाज में जहर घोलने का काम कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कभी दलित को ब्राह्मण से, तो कभी ओबीसी को एससी से, हिंदू को मुस्लिम से लड़ाकर वैमनस्यता फैला रही है. कांग्रेस नेता ने कहा कि वे ऐसे प्रश्नपत्रों पर विश्वास नहीं करते जो समाज में भेदभाव पैदा करें. उन्होंने संत रविदास जी की शिक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि समाज में ऊंच-नीच और जात-पात के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.
फिलहाल, एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे विभाग के भीतर छिपे अराजक तत्वों की शरारत बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की सोची-समझी नीति का हिस्सा करार दे रहा है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री को लिखे गए इस पत्र के बाद परीक्षा बोर्ड और सरकार इस विवादास्पद प्रश्न को लेकर क्या कदम उठाती है.
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